उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार की गिरफ्तारी के बाद आयोग को अब नए परीक्षा नियंत्रक की नियुक्ति का इंतजार है। हालांकि जिन परिस्थितियों में अंजू कटियार की गिरफ्तारी हुई है, उन विवादों के बीच नए परीक्षक नियंत्रक को कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना होगा।
अंजू कटियार की गिरफ्तारी के बाद अब किसी भी अफसर के लिए यह पद बड़ी चुनौती बन गया है। नए परीक्षा नियंत्रक के आने तक परीक्षाओं को लेकर कोई महत्वपूर्ण निर्णय भी नहीं लिया जा सकता है। ऐसे में आयोग को शासन स्तर से नए परीक्षा नियंत्रक की नियुक्ति का इंतजार है।
हालांकि आयोग के अफसरों और कर्मचारियों को मानना है कि आयोग में जो माहौल है, उन परिस्थितियों में बहुत कम अफसर इस पद को संभालने के लिए तैयार होंगे। वैसे भी परीक्षाओं में धांधली को लेकर अब भी कोई आरोप लगता है, उसमें परीक्षा नियंत्रक की जवाबदेही होती है। आयोग के सूत्रों का कहना है कि परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार एक साल से अपने ट्रांसफर के प्रयास में लगी थीं। इसके लिए उन्होंने शासन के उच्चाधिकारियों से मुलाकात भी की थी लेकिन उनका ट्रांसफर नहीं हुआ और इस बीच पेपर लीक प्रकरण में उनकी गिरफ्तारी हो गई।
एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती का पेपर आउट होने के बाद आयोग की परीक्षा समिति भी सवालों के घेरे में है। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय ने आयोग से जनसूचना अधिकार के तहत तीन बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी।
अवनीश ने पूछा था कि आयेाग की परीक्षा समिति में कौन पदाधिकारी शामिल हैं और परीक्षा समिति की जिम्मेदारियां क्या हैं। इस पर आयोग ने 13 सितंबर 2018 को अवनीश का जवाब दिया था कि एक अगस्त 2018 को जो परीक्षा समिति अस्तित्व में है, उसमें आयोग के सदस्य देवी प्रसाद द्विवेदी और डॉ. जयराम प्रसाद वैद्य शामिल हैं। यह जानकारी भी दी गई थी कि परीक्षा आदि से संबंधित बिंदुओं पर निर्णय लेने के लिए परीक्षा समिति गठित की जाती है और परीक्षा समिति की ओर से लिया गया निर्णय आयोग का ही निर्णय माना जाता है। अवनीश की कहना है कि एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा 29 जुलाई 2018 को आयोजित की गई थी। ऐसे में इस पूरे प्रकरण में परीक्षा समिति की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।