इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 907 असिस्टेंट प्रोफेसर पद की भर्ती मामले में यूपी सरकार को जवाब दाखिल करने का अंतिम मौका दिया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में आदेश अगली सुनवाई होगा। यूपी सरकार उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग (यूपीएचईएससी) का कोरम पूरा नहीं कर रही है। सदस्यों की संख्या कम होने के कारण साक्षात्कार प्रक्रिया भी रुकी हुई है।
हाईकोर्ट : यूपीएचईएससी में 907 सहायक आचार्य भर्ती प्रक्रिया पूरी करने की मांग में याचिका पर सरकार से जवाब तलब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उच्चतर शिक्षा आयोग प्रयागराज की 907 सहायक आचार्य के पदों की भर्ती की लिखित परीक्षा व साक्षात्कार कराने व आयोग के अध्यक्ष व एक सदस्य का पद रिक्त होने के बावजूद बिना बाधा भर्ती प्रक्रिया पूरी करने की मांग में दाखिल याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। याचिका को सुनवाई के लिए 27 अप्रैल को पेश करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार ने चित्रकूट के महेंद्र सिंह, जौनपुर के ऋतुराज यति, प्रयागराज के रजत सिंह व संत कबीर नगर के उमेश कुमार श्रीवास्तव की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।
याचिका पर अधिवक्ता अनूप बरनवाल ने बहस की। इनका कहना है कि आयोग में इस समय मात्र दो सदस्य कार्यरत हैं। अध्यक्ष व एक सदस्य का कार्यकाल पूरा हो चुका है और रिक्त पदों पर नियुक्ति नहीं की गई है। आठ जुलाई 202 2को आवेदन मांगे गए थे। आयोग में पद रिक्त होने के कारण भर्ती रोक दी गई है, जो अभ्यर्थी याचियों के मूल अधिकारों का उल्लघंन है।
धारा 13(1) उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग पर भर्ती प्रक्रिया पूरी करना बाध्यकारी है। क्योंकि कुछ पद खाली होने मात्र से आयोग समाप्त नहीं होता। आयोग को परीक्षा व साक्षात्कार कराने का अधिकार है। यह 90 हजार अभ्यर्थियों के भविष्य से खिलवाड़ है और जीवन के अधिकार का हनन है। साथ ही प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लघंन है। इसलिए आयोग के दो सदस्यों को भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया जाय।