कहीं प्रबंधन ने प्राचार्य पद पर चयनित अभ्यर्थी को ज्वाइन नहीं कराया तो कहीं ज्वाइन करने के बाद प्रबंधन से विवाद के कारण अभ्यर्थी अपना इस्तीफा देकर मूल तैनाती वाले कॉलेज में लौट गए। कई मामलों में तो उच्च शिक्षा निदेशालय को सीधे हस्तक्षेप करना पड़ा। प्राचार्य के रिक्त पदों पर भर्ती की जिम्मेदारी अब नए शिक्षा सेवा चयन आयोग के पास है।
लंबे इंतजार के बाद शिक्षा सेवा चयन आयोग का गठन तो हो गया, लेकिन भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होने के आसार कम हैं। अभी पुरानी भर्तियां ही लंबित पड़ी हैं और आयोग की प्राथमिकता इन्हें पहले पूरा कराना है।
प्राचार्य के पदों पर भर्ती के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से नए आयोग को अधियाचन भेजा जाएगा। इसके बाद आयोग भर्ती का विज्ञापन जारी करेगा। फिलहाल रिक्त पदों की गणना का काम अभी नहीं शुरू हुआ है।
कॉलेजों में शिक्षकों का भी टोटा
राजकीय और अशासकीय महाविद्यालयों में प्राचार्यों के साथ शिक्षकों का भी टोटा है, जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। राजकीय कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से तकरीबन साढ़े तीन सौ पदों का अधियाचन भेजा जा चुका है, लेकिन स्क्रीनिंग परीक्षा की नियमावली से मंजूरी के इंतजार में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने अब तक भर्ती का विज्ञापन नहीं जारी किया है।
वहीं, अशासकीय महाविद्यालयाें में असिस्टेंट प्रोफेसर के 1017 पदों पर दो वर्ष से भर्ती प्रक्रिया अटकी हुई है। इन पदों पर भर्ती के लिए आवेदन की प्रक्रिया अगस्त-2022 में पूरी हो चुकी है, लेकिन अब तक परीक्षा तिथि भी घोषित नहीं की जा सकी है।