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UPESSC : प्रमोशन, भर्ती के इंतजार में प्राचार्यों के 180 पद खाली, अशासकीय कॉलेजों में भर्ती अटकी

Sun, 14 Apr 2024 06:07 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

राजकीय महाविद्यालयों में केवल प्रमोशन से प्राचार्य के पद भरे जाते हैं। ऐसे में जब तक डीपीसी नहीं होती, तब तक पद़ खाली रहेंगे।राजकीय महाविद्यालयों में प्राचार्य पद पर प्रमोशन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए शिक्षक संगठनों ने काफी प्रयास किए लेकिन कई मामले कोर्ट में होने के कारण शासन ने यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई।
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उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रमोशन और भर्ती के इंतजार में राजकीय एवं अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में प्राचार्यों के 180 पद खाली पड़े हैं। यह महाविद्यालय कार्यवाहक प्राचार्यों के भरोसे चल रहे हैं। राजकीय महाविद्यालयों में बीते कई वर्षों से प्राचार्य पद पर प्रमोशन के लिए डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी (डीपीसी) की बैठक नहीं हुई है। हालत यह है कि प्रदेश भर में कुल 170 राजकीय महाविद्यालयों में से 130 महाविद्यालयों में स्थायी प्राचार्य के पद खाली पड़े हैं।

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राजकीय महाविद्यालयों में केवल प्रमोशन से प्राचार्य के पद भरे जाते हैं। ऐसे में जब तक डीपीसी नहीं होती, तब तक पद़ खाली रहेंगे।राजकीय महाविद्यालयों में प्राचार्य पद पर प्रमोशन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए शिक्षक संगठनों ने काफी प्रयास किए लेकिन कई मामले कोर्ट में होने के कारण शासन ने यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई, जबकि पहले यह तय हुआ था कि जो मामले कोर्ट में लंबित हैं, उन्हें छोड़कर बाकी मामलों में प्रमोशन की प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका और पद अब तक खाली हैं।

वहीं, अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों की स्थिति भी अच्छी नहीं है। प्रदेश भर में 331 अशासकीय महाविद्यालय हैं और इनमें से तकरीबन 50 महाविद्यालयों में प्राचार्यों के पद रिक्त पड़े हैं। इनमें अब तक उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के माध्यम से प्राचार्य के पदों पर भर्ती होती थी। दो वर्ष पहले आयोग ने प्राचार्य के 290 पदों पर भर्ती की थी, लेकिन इस दौरान विभिन्न कारणों से तकरीबन 50 पद खाली हो चुके हैं।

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कहीं प्रबंधन ने प्राचार्य पद पर चयनित अभ्यर्थी को ज्वाइन नहीं कराया तो कहीं ज्वाइन करने के बाद प्रबंधन से विवाद के कारण अभ्यर्थी अपना इस्तीफा देकर मूल तैनाती वाले कॉलेज में लौट गए। कई मामलों में तो उच्च शिक्षा निदेशालय को सीधे हस्तक्षेप करना पड़ा। प्राचार्य के रिक्त पदों पर भर्ती की जिम्मेदारी अब नए शिक्षा सेवा चयन आयोग के पास है।

लंबे इंतजार के बाद शिक्षा सेवा चयन आयोग का गठन तो हो गया, लेकिन भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होने के आसार कम हैं। अभी पुरानी भर्तियां ही लंबित पड़ी हैं और आयोग की प्राथमिकता इन्हें पहले पूरा कराना है।

प्राचार्य के पदों पर भर्ती के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से नए आयोग को अधियाचन भेजा जाएगा। इसके बाद आयोग भर्ती का विज्ञापन जारी करेगा। फिलहाल रिक्त पदों की गणना का काम अभी नहीं शुरू हुआ है।
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कॉलेजों में शिक्षकों का भी टोटा

राजकीय और अशासकीय महाविद्यालयों में प्राचार्यों के साथ शिक्षकों का भी टोटा है, जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है। राजकीय कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से तकरीबन साढ़े तीन सौ पदों का अधियाचन भेजा जा चुका है, लेकिन स्क्रीनिंग परीक्षा की नियमावली से मंजूरी के इंतजार में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने अब तक भर्ती का विज्ञापन नहीं जारी किया है।

वहीं, अशासकीय महाविद्यालयाें में असिस्टेंट प्रोफेसर के 1017 पदों पर दो वर्ष से भर्ती प्रक्रिया अटकी हुई है। इन पदों पर भर्ती के लिए आवेदन की प्रक्रिया अगस्त-2022 में पूरी हो चुकी है, लेकिन अब तक परीक्षा तिथि भी घोषित नहीं की जा सकी है।
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