जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और इंडियन बैंक को ज्वैलरी दुकान से चोरी के मामले में 1,65,900 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। मानसिक और आर्थिक क्षतिपूर्ति के रूप में 10 हजार रुपये और वाद व्यय के लिए 5,000 रुपये का भी भुगतान करने का निर्देश दिया। यह आदेश आयोग के अध्यक्ष मोहम्मद इब्राहीम व सदस्य सरला ने मेसर्स इलाहाबाद ज्वैलर्स के मालिक मोहम्मद सिद्दीक खां की ओर से दायर एक शिकायत पर दिया।
सदर तहसील स्थित मेसर्स इलाहाबाद ज्वैलर्स के प्रोपराइटर ने 28 अप्रैल 2004 को इंडियन बैंक के माध्यम से यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से दुकान में रखे गहनों का बीमा कराया था। पॉलिसी 28 अप्रैल 2004 से 27 अप्रैल 2005 तक वैध थी। डिस्प्ले में रखे आभूषणों का 2,55,000 रुपये का बीमा और लॉकर में रखे आभूषण का 2,70,000 रुपये का बीमा कराया था। बीमा के दौरान ही 11-12 मार्च 2005 की रात को दुकान में चोरी हो गई। 12 मार्च 2005 को शाहगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया।
1,65,900 रुपये कीमत के गहनों की चोरी का दावा कर उन्होंने बीमा कंपनी के समक्ष बीमा राशि का भुगतान करने के लिए आवेदन किया जिसे खारिज कर दिया गया। इसके खिलाफ उपभोक्ता आयोग में परिवाद दाखिल किया। बीमा कंपनी ने दावा किया प्रोपराइटर ने दावा किया कि लॉकर सुरक्षित थी और चोरी केवल तिजोरी के बाहर रखे सामान की हुई थी।
आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी ने अपने दावों को साबित करने के लिए कोई दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किया। साथ ही डिस्प्ले में रखे गहनों का भी 2,55,000 रुपये का बीमा था। ऐसे में भले ही लॉकर नहीं तोड़ा गया था, फिर भी बीमा कंपनी दावे के भुगतान के लिए जिम्मेदार है। आयोग ने बैंक और बीमा कंपनी को सेवा में कमी के उत्तरदायी मानते हुए दो माह के अंदर मुआवजा आठ प्रतिशत ब्याज के सहित भुगतान का आदेश दिया।