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UP Roadways : संविदा महिला परिचालकों को नहीं भायी नौकरी, 40 फीसदी से ज्यादा ने नौकरी छोड़ी

Mon, 07 Jul 2025 06:20 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

एक ओर जहां नौकरी के लिए मारामारी मची हुई है, वहीं दूसरी ओर यूपी रोडवेज के प्रयागराज रीजन में संविदा पर रखी गईं महिला परिचालकों में से 40 फीसदी से ज्यादा ने नौकरी ही छोड़ दी है।
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यूपी रोडवेज। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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एक ओर जहां नौकरी के लिए मारामारी मची हुई है, वहीं दूसरी ओर यूपी रोडवेज के प्रयागराज रीजन में संविदा पर रखी गईं महिला परिचालकों में से 40 फीसदी से ज्यादा ने नौकरी ही छोड़ दी है। अधिकांश ने नौकरी छोड़ने की वजह भी नहीं बताई। इन्हें दो माह पूर्व रोडवेज की ओर से आयोजित रोजगार मेले में तमाम प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद रखा गया था।

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दरअसल, राष्ट्रीय आजीविका मिशन और उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के सहयोग से दो माह पूर्व झूंसी वर्कशॉप में रोजगार मेला लगाया गया था। इसमें 250 से ज्यादा महिला अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। वहीं, 93 को संविदा पर परिचालक पद पर तैनात किया गया था। लेकिन, अब प्रयागराज रीजन के नौ डिपो में 54 संविदा महिला परिचालक ही ड्यूटी कर रही हैं।

मंझनपुर, प्रतापगढ़ और जीरोरोड डिपो में नौकरी छोड़ने वालों की संख्या ज्यादा

रीजन के कौशाम्बी जिले के मंझनपुर डिपो में 10 संविदा महिला परिचालकों की तैनाती हुई, लेकिन यहां अब कोई भी काम नहीं कर रहा है। इसी तरह प्रतापगढ़ डिपो में 11 की तैनाती हुई, लेकिन वहां अब चार संविदा महिला परिचालक हैं। प्रयागराज के जीरोरोड डिपो में 18 में से अब नौ ही कार्य कर रही हैं। लीडर रोड में छह में से तीन, लालगंज में सात में से एक महिला कर्मी तैनात हैं। रीजन में एकमात्र प्रयाग डिपो ही है, जहां सभी पांच महिलाकर्मी तैनात हैं। इसी तरह सिविल लाइंस डिपो में 27 में से 26 और मिर्जापुर डिपो में सात में से छह महिलाएं तैनात हैं। बादशाहपुर डिपो में भी किसी महिला कर्मी की नियुक्ति नहीं की गई थी।

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महिला परिचालकों की दिन में ही ड्यूटी लगाई जाती है। ताकि वह शाम तक लौट आएं। नौकरी छोड़ने की वजह से किसी ने वाजिब वजह नहीं बताई है। रोडवेज आगे भी भर्ती के लिए रोजगार मेला लगाता रहेगा। संविदा पर परिचालकों की भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया चल रही है। - रविंद्र कुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक, यूपी रोडवेज प्रयागराज रीजन

संविदा पर नौकरी उतनी आसान नहीं है। रोडवेज प्रशासन ध्यान रखता है कि महिला परिचालकों की ड्यूटी दिन में ही लगे। लेकिन, जाम लगने एवं अन्य वजहाें से महिलाओं को गंतव्य तक पहुंचने में रात हो जाती है। कभी-कभी यात्री भी महिला कर्मियों से बदतमीजी करने लगते हैं। यूनियन नेताओं से तमाम महिलाकर्मियों ने अपना यह दर्द साझा भी किया है। - उमा शंकर मौर्य, क्षेत्रीय मंत्री उ.प्र. रोडवेज कर्मचारी संघ

साधारण बसों के मुकाबले एसी बसों में परिचालक की ड्यूटी कुछ आसान है, लेकिन, इसकी संख्या सीमित है। सभी महिलाओं की एसी बस में ड्यूटी नहीं लग सकती। इसके अलावा सफर के दौरान टॉयलेट आदि की भी समस्या झेलनी पड़ती है। - रेखा देवी, सेवानिवृत्त रोडवेज कर्मी

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