केंद्र की सत्ता में लगातार तीसरी बार भाजपा के आने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ही जमीन तैयार करेगा। देश को कई प्रधानमंत्री देने वाली संगम नगरी के राजनीतिक कद को देखते हुए खुद संघ प्रमुख मोहन भागवत प्रयागराज पहुंच गए हैं। वह यहां एक-दो दिन नहीं, बल्कि आठ दिनों से ज्यादा समय का प्रवास करने जा रहे हैं। यह पहला मौका है कि संघ प्रमुख प्रयागराज में सरसंघचालक के रूप में इतना लंबा प्रवास करेंगे।
दरअसल प्रयागराज में 16 से 19 अक्तूबर तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय होने हैं। इसकी तैयारियां बीते कई दिनों से चल रही हैं। बैठक में सामाजिक समरसता व देश के मौजूदा हालात पर तो चर्चा होगी ही, संघ के वर्ष 2025 में होने वाले शताब्दी वर्ष को लेकर भी लोगों को एकजुट करने की कवायद पर मंथन होगा।
चार दिवसीय बैठक में संघ कार्य के विस्तार का वृत्तांत लिए जाने के साथ देश में वर्तमान में चल रहे समसामयिक विषयों पर भी चर्चा होगी। इस दौरान विजयदशमी उत्सव पर सरसंघचालक के उद्बोधन में उल्लिखित विषयों के अनुवर्तन पर भी चर्चा होगी। विशेष रूप से समरस समाज के लिए उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी दी जाएगी। बैठक में पदाधिकारियों संग भी कार्ययोजना बनाई जा सकती है।
शताब्दी वर्ष की गूंज पूरे देश में करने की तैयारी : कानपुर में हुए संघ के पांच दिवसीय शिविर के समापन में ही मोहन भागवत ने एक भारत-श्रेष्ठ भारत के तहत हिंदुत्व के एकत्रीकरण की बात कही थी। उनकी इस बात के तमाम मायने भी निकाले जा रहे हैं। प्रयागराज की बैठक में लोगों को संघ के बारे में जानकारी देने के लिए तमाम कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाई जा सकती है। इसमें सेवा, संस्कार, समरसता आदि के स्वरूप पर मंथन किया जाएगा।
मंदिर, पानी, श्मशान को लेकर भेदभाव न होने देना प्रमुख एजेंडा
मंदिर, पानी और श्मशान को लेकर कहीं भी भेदभाव न होने देना संगम नगरी की बैठक में प्रमुख एजेंडा होगा। संघ की तैयारी है कि घर-घर स्वयंसेवकों की पहुंच हो। हर गांव में उसकी शाखाएं लगें। प्रदेश में योगीराज होने से संघ का प्रमुख फोकस उत्तर प्रदेश ही है क्योंकि लोकसभा की सर्वाधिक 80 सीटें यूपी से ही हैं। संघ पदाधिकारी भी जानते हैं कि दिल्ली की कुर्सी का रास्ता लखनऊ से होकर ही जाता है।
इसी वजह से घर-घर स्वयंसेवकों की पहुंच बनाने और प्रत्येक परिवार में स्वयंसेवक तैयार करने का संदेश बैठक के माध्यम से दिया जा सकता है। इसमें अनुसूचित जातियों के लोगों को एकजुट कर शाखाओं में नियमित रूप से उनकी उपस्थिति भी दर्ज करवाना है। संघ की मंशा है कि स्वयंसेवकों के भरोसे 2024 में भाजपा को रिकॉर्ड जीत मिले।