फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP : हाईकोर्ट का अहम फैसला- चार्जशीट के बाद बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका सुनवाई योग्य नहीं

Fri, 29 May 2026 01:44 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि यदि किसी आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और अदालत मामले का संज्ञान लेकर ट्रायल शुरू कर चुकी है, तो बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका सुनवाई योग्य नहीं रहेगी।
विज्ञापन
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि यदि किसी आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और अदालत मामले का संज्ञान लेकर ट्रायल शुरू कर चुकी है, तो बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका सुनवाई योग्य नहीं रहेगी। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने ललितपुर निवासी नीरज याचिका पर दिया है।

विज्ञापन


याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि दहेज हत्या व अन्य मामले में गिरफ्तारी के समय उसे कानूनी आधार नहीं बताए गए और परिजनों को सूचना भी नहीं दी गई, जिससे स्वतंत्रता अधिकार का उल्लंघन हुआ। वहीं राज्य सरकार ने दलील दी कि चार्जशीट दाखिल होने, अदालत की ओर से संज्ञान लेने और आरोप तय होने के बाद आरोपी न्यायिक हिरासत में वैध रूप से बंद है।

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि हिरासत की वैधता उस समय देखी जाती है जब अदालत सुनवाई कर रही हो। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में आरोपी नियमित जमानत याचिका के दौरान अपने अधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा उठा सकता है। इसी के साथ याचिका खारिज कर दी। 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें