लंबे समय से परीक्षार्थी कर रहे थे मांग
अयोध्या स्थित दृष्टि बाधित, दिव्यांग समिति के राष्ट्रीय महासचिव विवेकमणि त्रिपाठी ने बताया कि हमारी समिति पिछले 10 वर्षों से इसके लिए संघर्ष कर रही थी। श्रुति लेखक के अधिकतम 45 प्रतिशत अंक वाले नियम की वजह से हर वर्ष बहुत से दृष्टिबाधित परीक्षार्थी परीक्षा से वंचित हो जाते थे। यह समझना सामान्य बात है कि कक्षा नौ और कक्षा 11 में 45 प्रतिशत अंक पाने वाले विद्यार्थी कम ही होते हैं। इस वजह से बहुत से परीक्षार्थी परीक्षा में नहीं शामिल हो पाते थे। प्रदेश में हर साल लगभग आठ हजार दृष्टिबाधित परीक्षार्थी बोर्ड की परीक्षा में शामिल होते हैं।
एक कक्षा में एक ही श्रुति लेखक रहेगा
माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव दिब्यकांत शुक्ल ने इन नियमों में ढील देते हुए श्रुति लेखक के अधिकतम 45 प्रतिशत अंक होने के नियम को बदल दिया है। 16 फरवरी को बोर्ड की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि अब अपनी कक्षा में अधिकतम अंक पाने वाला भी दृष्टि बाधित परीक्षार्थी की श्रुति लेखक के रूप में सहायता कर सकता है। हालांकि, श्रुति लेखक जिसकी मदद कर रहा है, उससे एक कक्षा पीछे का विद्यार्थी होगा इस नियम को बरकरार रखा गया है। सचिव ने इस नियम को तत्काल प्रभाव से लागू करने के लिए प्रदेश के सभी विद्यालय निरीक्षकों को आदेश दिया है। जिससे समय रहते दिव्यांग परीक्षार्थी अपने लिए श्रुति लेखक का नाम केंद्रों को दे सकें।