सेवायतों की ओर से कहा गया कि सरकार मंदिर की सुविधा बढ़ाना चाहती है, इसपर उन्हें कोई आपत्ति नही है। लेकिन, इस काम के लिए मंदिर के पैसे का इस्तेमाल करना चाहती है। अधिवक्ता संजय गोस्वामी ने याचिका की पोषणीयता पर सवाल उठाया। कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि तथ्य को लेकर कोई भी याचिका पोषणीय नहीं है। उसमें कानूनी सवाल होना जरूरी है। लिहाजा, याचिका पोषणीय नहीं है।
याची अधिवक्ता श्रेय गुप्ता ने कहा कि वर्तमान समय में मंदिर प्रबंधन समिति ही नहीं है। विवाद सिविल अदालत में विचाराधीन है। कहा कि आर्टिकल-25 और 26 में धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है, किंतु सरकार उचित हस्तक्षेप कर सकती है। इस पर कोर्ट ने जानना चाहा कि योजना लागू की जाती है तो मंदिर का प्रबंधन किसके हाथ होगा। हालांकि, सरकार की ओर से इस सवाल का जवाब नहीं दिया गया। मामले में अगली सुनवाई 11 अक्टूबर को होगी।