क्षेत्र में सोमवार को बेमौसम बूंदाबांदी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर तिलहनी फसलें जैसे सरसों एवं मटर पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार नमी रहने से सरसों में झुलसा रोग और माहू कीट का प्रकोप बढ़ सकता है, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होती हैं। वहीं, खेतों में पानी भरने से जड़ें कमजोर हो जाती हैं और पौधों के गिरने की समस्या भी सामने आ सकती है।
किसान भोला पटेल और विजय बहादुर यादव का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में मौसम साफ नहीं हुआ तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। कई किसानों ने पहले ही खाद, बीज और दवाइयों पर अच्छी-खासी लागत लगा रखी है। ऐसे में फसल खराब होने की स्थिति में उनकी मेहनत पर पानी फिर सकता है। कृषि रक्षा इकाई के प्रभारी संदीप पटेल ने किसानों को सलाह दी है कि वे मौसम पर नजर बनाए रखें और जहां संभव हों, वहां खेतों से जल निकासी की उचित व्यवस्था करें। साथ ही रोग और कीट नियंत्रण के लिए समय पर दवाओं का छिड़काव करें।