फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बिन मौसम मनेगी ईद, होगी होली

Thu, 23 Feb 2017 02:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
विज्ञापन
मिस्र का प्लेन हाईजैक - फोटो : Reuters
विज्ञापन
भले ही अभी होली आने में तकरीबन तीन सप्ताह, मुरादों के महीने रजब में तकरीबन डेढ़ माह तथा ईद की खुशियों में चार माह का वक्त बाकी है लेकिन लोकतंत्र के महापर्व पर वक्त से पहले ही इन त्योहारों की खुशियां बांटी, सहेजी जाएंगी। वोट डालने के लिए दूर देश से आए लोग अपनों से मिलेंगे तो ये खुशियां भी खुदबखुद त्योहारों से पहले आ जाएंगी।
विज्ञापन


दरअसल होली, दीवाली या ईद, मुहर्रम पर दूर बसे लोगों का घर लौटना तो लाजिमी है लेकिन लोकतंत्र का राष्ट्रीय पर्व मनाने के लिए भी लोगों का घरों को लौटना सुखद है। मतदान की चाहत और संकल्प ने कई महीनों से घर आने के लिए की जा रही तैयारियों पर मुहर लगा दी। रक्षा मंत्रालय में कार्यरत हजरतगंज, दरियाबाद के मुहम्मद अख्तर पूरे आठ महीने बाद छुट्टियां लेकर मतदान के मकसद से राजस्थान, बाड़मेर से घर लौटे हैं।

दरियाबाद निवासी ईदू के बेटे दिलशेर अहमद तो सऊदी अरब से तकरीबन ढाई बरस बाद घर आए हैं। मंशा मतदान है लेकिन पत्नी और बेटी से मिले तो उनकी ईद हो गई। अब्बास कॉलोनी के रेयाज अहमद के बेटे मेराज अहमद भी तकरीबन डेढ़ बरस बाद दुबई से वतन लौटे। बोले, पिछली बार ईद में ऐन वक्त पर कार्यक्रम टल गया, अब परिवार और अपने दोस्तों से मिलना हुआ तो मेरी ईद हो गई।
विज्ञापन


वहीं शास्त्रीनगर निवासी और गुडगांव में सॉफ्टवेयर इंजीनियर अनुभव श्रीवास्तव का भी बीते दस महीनों से घर आने का कार्यक्रम टलता रहा है लेकिन मतदान के लिए वह बुधवार को देर रात घर आ ही गए। मम्मी-पाप से मिले तो खुशियां दोगुनी हो गईं। इसी तरह मेहंदौरी कालोनी के रहने वाले और दिल्ली यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर सौम्य मालवीय भी पहली बार वोट के उत्साह में घर आए हैं। बीते चुनाव में वह मतदान से वंचित रह गए थे। बोले, होली तो पहले ही हो गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें