भले ही अभी होली आने में तकरीबन तीन सप्ताह, मुरादों के महीने रजब में तकरीबन डेढ़ माह तथा ईद की खुशियों में चार माह का वक्त बाकी है लेकिन लोकतंत्र के महापर्व पर वक्त से पहले ही इन त्योहारों की खुशियां बांटी, सहेजी जाएंगी। वोट डालने के लिए दूर देश से आए लोग अपनों से मिलेंगे तो ये खुशियां भी खुदबखुद त्योहारों से पहले आ जाएंगी।
दरअसल होली, दीवाली या ईद, मुहर्रम पर दूर बसे लोगों का घर लौटना तो लाजिमी है लेकिन लोकतंत्र का राष्ट्रीय पर्व मनाने के लिए भी लोगों का घरों को लौटना सुखद है। मतदान की चाहत और संकल्प ने कई महीनों से घर आने के लिए की जा रही तैयारियों पर मुहर लगा दी। रक्षा मंत्रालय में कार्यरत हजरतगंज, दरियाबाद के मुहम्मद अख्तर पूरे आठ महीने बाद छुट्टियां लेकर मतदान के मकसद से राजस्थान, बाड़मेर से घर लौटे हैं।
दरियाबाद निवासी ईदू के बेटे दिलशेर अहमद तो सऊदी अरब से तकरीबन ढाई बरस बाद घर आए हैं। मंशा मतदान है लेकिन पत्नी और बेटी से मिले तो उनकी ईद हो गई। अब्बास कॉलोनी के रेयाज अहमद के बेटे मेराज अहमद भी तकरीबन डेढ़ बरस बाद दुबई से वतन लौटे। बोले, पिछली बार ईद में ऐन वक्त पर कार्यक्रम टल गया, अब परिवार और अपने दोस्तों से मिलना हुआ तो मेरी ईद हो गई।
वहीं शास्त्रीनगर निवासी और गुडगांव में सॉफ्टवेयर इंजीनियर अनुभव श्रीवास्तव का भी बीते दस महीनों से घर आने का कार्यक्रम टलता रहा है लेकिन मतदान के लिए वह बुधवार को देर रात घर आ ही गए। मम्मी-पाप से मिले तो खुशियां दोगुनी हो गईं। इसी तरह मेहंदौरी कालोनी के रहने वाले और दिल्ली यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर सौम्य मालवीय भी पहली बार वोट के उत्साह में घर आए हैं। बीते चुनाव में वह मतदान से वंचित रह गए थे। बोले, होली तो पहले ही हो गई।