मजिस्ट्रेट के आदेश को पिता ने हाईकोर्ट में दी थी चुनौती
याची पिता ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश को जिला जज की अदालत में चुनौती दी। लेकिन, जिला जज ने पिता की अपील खारिज कर दी। इसके खिलाफ पिता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याची पिता ने दलील दी कि उसकी बेटियां बालिग हैं और स्वस्थ हैं। वह ट्यूशन पढ़ा कर कमाई भी करती हैं। बेटियां उसके साथ रह रही हैं और वह उनका सारा खर्चा वहन कर रहा है। याची ने अपनी उम्र, आर्थिक तंगी और मुस्लिम विधि का भी हवाला देते हुए निचली अदालत द्वारा दिए गए फैसले को रद्द करने की मांग की।
कोर्ट ने याची पिता की दलीलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मौजूदा मामला परिवारिक हिंसा से जुड़ा है। इसलिए अविवाहित बेटी किसी भी धर्म, आयु और समुदाय की हो, उसे घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत संरक्षण प्राप्त है। कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले पर अपनी मुहर लगाते हुए याची पिता की याचिका खारिज कर दी।