उनका चर्चित गजल था- इलाहाबाद आना हम तुम्हें संगम दिखाएंगे
वर्ष 1998 में मजीदिया इंटर कॉलेज में अतीक इलाहाबादी की किताब के विमोचन के मौके पर एक स्मारिका का भी मुनव्वर साहब ने विमोचन किया था। तब उनकी एक गजल उस स्मारिका में प्रकाशित हुई थी। उनके गजल का शेर था- इलाहाबाद आना हम तुम्हें संगम दिखाएंगे...।
वह इलाहाबाद के मुरीद थे। इलाहाबादी अमरूद पर भी उन्होंने खूब लिखा था। इसी तरह कवि श्लेष गौतम भी उनसे जुड़ी स्मृतियां साझा करते हैं। वह बताते हैं कि वर्ष 2017 में कल्याणी देवी के चौधरी गार्डेन मे हुए मुशायरे में आखिरी बार वह आए थे। वह बहुत मस्तमौला इंसान होने के साथ ही शायरी के जादूगर थे।
गुफ्तगू पत्रिका के संपादक इम्तियाज अहमद गाजी से भी उनका गहरा ताल्लुक रहा है। वह बताते हैं कि कभी भी उन्होंने उनके आग्रह को नहीं ठुकराया। गुफ्तगू पत्रिका के विमोचन में भी एक बार वह शामिल हुए थे। वह हमेशा इलाहाबाद को अपने दिल में बसाए रहे। करीब 12 वर्ष पहले मुनव्वर राना ने एक कार खरीदी थी, तब उन्होंने उसका नंबर इलाहाबाद का लिया था।