न्याय में देरी के लिए हड़ताल जिम्मेदार है: न्यायाधीश सूर्यकांत
मुख्य अतिथि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश सूर्यकांत ने न्यायिक सुधार के लिए जजों की नियुक्ति में पारदर्शिता लाने व हड़ताल पर लगाम लगाने पर जोर दिया। कहा कि जजों की नियुक्ति में उम्मीदवारों के समायोजन से ज्यादा उनकी गुणवत्ता परखनी जरूरी है। इस पद का मकसद शक्ति हासिल करना नहीं, बल्कि पीड़ित को न्याय प्रदान करना है। न्याय ऐसा हो, जिससे लोगों में अदालतों के प्रति भरोसा मजबूत हो। न्याय में देरी चिंता का विषय है, इसके लिए अदालतों में होने वाली हड़ताल जिम्मेदार है। अदालत अस्पताल की तरह है। पीड़ित को न्याय देने और दिलाने के लिए हमें हर वक्त तैयार रहना होगा।
अध्यक्षता करते हुए पूर्व सीजेआई जस्टिस रंजन गोगोई ने भी अदालतों में लंबित मुकदमों पर चिंता जताई। कहा कि कहा कि केवल इलाहाबाद हाईकोर्ट में 8-10 लाख मुकदमे लंबित हैं। हर दिन 200 से ज्यादा नए मुकदमे दाखिल हो रहे हैं। लेकिन, 160 के मुकाबले मात्र 80 जज काम कर रहे हैं। जनसंख्या के अनुपात जजों की कमी हमेेशा से खलती रही है। इस पर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश पंकज मिथल, हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली, पूर्व न्यायाधीश एपी मिश्रा, न्यायामूर्ति तरुण अग्रवाल, बीसीआई से चेयरमैन मनन मिश्रा व वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश चंद्र राजवंशी ने संबोधित किया। संचालन पंडित कन्हैया लाल मिश्रा मेमोरियल कमेटी के सचिव संतोष कुमार त्रिपाठी ने किया।
इस अवसर पर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता, न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल, न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया, न्यायमूर्ति अनीस कुमार गुप्ता, न्यायमूर्ति जेजे मुनीर समेत कई वरिष्ठ अधिवक्ता रहे।
पूर्व सीजेआई ने कहा- मंत्री जी...जज भी इंसान हैं
लंबित मुकदमों और जजों की कमी पर पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई का भी दर्द छलका। अपने 13 महीने के कार्यकाल पर उन्होंने कहा कि आज जब लोग मुझसे पूछते है कि मैं इन समस्याओं का हल क्यों नहीं निकाल सका तो मौन होना पड़ता है। लगता है कि अपने कार्यकाल में मैंने कुछ किया ही नहीं। अफसोस मंत्री जी...जज भी इंसान हैं। जजों की नियुक्ति में तेजी लाई जाए, ताकि बढ़ रहे मुकदमों का बोझ संभल सके।