शर्मा राजपूत (42), जोकि फतेहपुर के सुल्तानपुर घोष का रहने वाला है। वह डीसीएम गाड़ी चलाता है। शर्मा राजपूत ने बताया कि 27 जून को कौशाम्बी में उसकी गाड़ी की ब्रेक फेल होने की वजह से उसका एक्सीडेंट हो गया था।
एसआरएन अस्पताल में बृहस्पतिवार को मरीज को डिस्चार्ज कराने गए मामा के बेटे को प्राइवेट अस्पताल का दलाल बताकर डॉक्टरों ने पुलिस को सौंप दिया। मरीज और उसके परिजन के बार-बार बताने पर भी डॉक्टरों ने उनकी एक भी बात न सुनी। थोड़ी देर में जब इसकी सूचना मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह को दी गई तो उन्होंने युवक को पुलिस से छुड़वाकर मरीज को भी डिस्चार्ज करवाया।
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शर्मा राजपूत (42), जोकि फतेहपुर के सुल्तानपुर घोष का रहने वाला है। वह डीसीएम गाड़ी चलाता है। शर्मा राजपूत ने बताया कि 27 जून को कौशाम्बी में उसकी गाड़ी की ब्रेक फेल होने की वजह से उसका एक्सीडेंट हो गया था। जिसमें उसके दोनों पैरों में गंभीर चोटें आई थीं। एंबुलेंस से उसे मंझनपुर के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया। जहां प्राथमिक उपचार के बाद एसआरएन अस्पताल रेफर कर दिया गया।
उन्होंने बताया कि एसआरएन में 28 जून को भर्ती कराया गया। आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद सारी दवाएं बाहर से लिखी गईं। दो दिन में 15 हजार रुपये का बिल बन गया। कहा कि दाहिने पैर की हड्डी टूटी गई है और बाएं पैर में भी गंभीर चोट आई है।
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उसने अपने मामा के लड़के कृष्णमुरारी को बुलवाकर डिस्चार्ज करवाने को कहा, तो यहां के डॉ. प्रवल ने कृष्णमुरारी को प्राइवेट अस्पताल का दलाल बताकर एसआरएन चौकी के पुलिस को सौंप दिया। उसे यहां से डिस्चार्ज नहीं किया गया। उधर पुलिस कृष्णमुरारी को घंटों एसआरएन चौकी में बिठाए रही। जब इसकी सूचना मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह को दी गई तो मामले को संज्ञान में लेते हुए उन्होंने तुरंत चौकी में बिठाए गए कृष्णमुरारी को छुड़वाया। मरीज को भी अस्पताल से डिस्चार्ज करवा दिया।