नारायण सिंह बताते हैं कि उनकी विवेचना में छह और लोगों के नाम जोड़े गए। इसमें गुड्डू मुस्लिम का भी था। जब वे विवेचना कर रहे थे तो उनके पास कई बार पाकिस्तान के नंबरों से धमकी भरे फोन आए। कहा गया कि ‘भाई’ को फंसाया तो बचोगे नहीं। उन्होंने पूरी जानकारी अधिकारियों को दी। डीजीपी को भी बताया। इसी के बाद वे अपनी जेब और घर के ब्रीफकेस में एक कागज रखने लगे, जिसमें लिखा था कि उनकी मौत किसी कारण से हुई तो इसकी जिम्मेदार अतीक अहमद ही होगा। एक बार तो उन्हें 50 लाख का ऑफर दिया गया।
कहा गया कि चार्जशीट भी लगा दो लेकिन केस ऐसा बनाओ कि अदालत में टिक न पाए। एक बार दबी जुबान में धमकी दी गई कि अतीक जिसको चाहता है, उसे दुष्कर्म में फंसा देता है। राजू पाल हत्याकांड में नारायण सिंह परिहार के बाद विवेचना 2009 में सीबीसीआईडी को सौंपी गई। 2016 से जांच सीबीआई कर रही है।
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अशरफ की मोबाइल लोकेशन निकालने पर इंस्पेक्टर का रातोंरात हुआ था ट्रांसफर
राजू पाल हत्याकांड की विवेचना करने वाले दूसरे विवेचक सुरेंद्र सिंह का रातों रात सिर्फ इसलिए तबादला कर दिया गया था कि उन्होंने अशरफ की मोबाइल लोकेशन को विवेचना में शामिल कर लिया था।
अशरफ ने राजू पाल का पीछा किया था। राजू पाल के मोबाइल की लोकेशन जहां जहां थी, अशरफ के मोबाइल की लोकेशन भी वहीं ट्रेस हुई थी। जिस दिन यह तथ्य विवेचना में शामिल किया गया, उसी दिन सुरेंद्र सिंह के खिलाफ 13 मामलों में जांच के आदेश दिए गए। रात में उनका बांदा ट्रांसफर हो गया।
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