अधार्मिक होने का आरोप लगाए जाने, जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल, नोटिस, निष्कासन और हॉस्टल आवंटन के मुद्दे से आहत दो छात्रों ने बृहस्पतिवार को छात्रसंघ भवन के सामने खुद पर तेल छिड़कर आत्मदाह की कोशिश की। इनमें से एक छात्रसंघ उपाध्यक्ष अदील हमजा हैं। हालांकि पहले से ही आंदोलन की चेतावनी दिए जाने पर पुलिस वहां मौजूद थी। दोनों छात्रों ने जैसे ही खुद पर तेल डाला, पुलिस ने पकड़ लिया। उन्हें छुड़ाने के लिए अन्य छात्रों की पुलिस से झड़प भी हो गई। पुलिस को लाठियां पटककर छात्रों को वहां से खदेड़ना पड़ा। दोनों को पुलिस लाइन लेकर जाकर बैठा दिया गया। घटना के बाद छात्रों ने इविवि परिसर में सभी काउंटर बंद करा दिए।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रसंघ भवन के सामने दोपहर 12 के आसपास उपाध्यक्ष अदील हमजा और एक अन्य छात्र चंद्रशेखर चौधरी ने खुद पर तेल छिड़ककर आग लगाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने दोनों को पकड़ लिया। पुलिस उन्हें जीप में बैठकर ले जाने लगी तो छात्र जीप के सामने लेट गए और पुलिस से उनकी झड़प हो गई। पुलिस ने लाठियां पटककर छात्रों को वहां से खदेड़ दिया। घटना से नाराज छात्र सबसे पहले डीएसडब्ल्यू कार्यालय पहुंचे और वहां के काउंटर बना कर दिए। इविवि में प्रवेश के लिए बने अन्य काउंटर भी बंद करा दिए गए।
प्रदेश सरकार की नीतियों के खिलाफ सीएम का पुतला फूंकने पर छात्रसंघ उपाध्यक्ष पर चीफ प्रॉक्टर ने अधार्मिक होने का आरोप लगाया था और परिसर में उनका प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया था। वहीं, चंद्रशेखर चौधरी का आरोप है कि डीन आर्ट्स प्रो. केएन मिश्र ने छात्र के लिए जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। मामले में छात्र ने पुलिस को तहरीर दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके अलावा दोनों छात्र हॉस्टल आवंटन की पुरानी प्रक्रिया को भी बहाल किए जाने और इविवि में भ्रष्टाचार की जांच कराने की मांग कर रहे थे, लेकिन इविवि प्रशासन इसके लिए तैयार नहीं है। इन्हीं मुद्दों पर दोनों छात्रों ने आत्मदाह करने की कोशिश की। फिलहाल शाम के वक्त दोनों को सिटी मजिस्ट्रेट के न्यायालय में उपस्थित किया गया, जहां से उन्हें जमानत मिल गई।
कुलपति से मिलने और आंदोलनकारी छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई की जांच के लिए कमेटी गठित किए जाने के आश्वासन के बाद बृहस्पतिवार को छात्रों का आमरण अनशन समाप्त हो गया। पुलिस वहां बैठे अनशनकारियों को दो बार उठा चुकी थी। छात्र वहां तीसरी बार अनशन पर बैठे थे। बृहस्पतिवार को जब दो छात्रों ने आत्मदाह की कोशिश की तो इविवि प्रशासन बैक फुट पर आ गया और जिला प्रशासन एवं पुलिस के हस्तक्षेप के बाद इविवि प्रशासन की ओर से मिले आश्वासन के बाद अनशन तोड़ा गया।
छात्रसंघ भवन के सामने हुई घटना के बाद छात्र संघ अध्यक्ष रोहित मिश्र तमाम बड़ी संख्या में छात्र अनशन स्थल पर पहुंचे। वहां छात्र नीरज सिंह ने आमरण अनशन की कमान संभाल रखी थी। घटना के बाद बवाल की आशंका को देखते हुए इविवि प्रशासन की ओर से चीफ प्रॉक्टर प्रो. राम सेवक दुबे एवं अन्य अफसरों के साथ एडीएम सिटी, एसीएम प्रथम, सीओ कर्नलगंज ने छात्रों से वार्ता की। यह वार्ता चीफ प्रॉक्टर के कार्यालयम में हुई। छात्रों की मांग पर सहमति बनी कि पहली अगस्त को शाम चार बजे वैध छात्रों का पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल वीसी से मिलेगा।
इनमें छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्र, उपाध्यक्ष अदील हमजा समेत तीन अन्य छात्र होंगे, जिनके पास इविवि से जारी आईकार्ड होगा। इसके अलावा जिन छात्रों को नोटिस देकर ब्लैक लिस्टेड किया गया, निष्कासन हुआ, परिसर में प्रवेश प्रतिबंधित किया गया, उनके मामलों की जांच के लिए एक हफ्ते में कमेटी का गठन कर जांच पूरी करने और मामले का निस्तारण करने का आश्वासन दिया गया। इसके बाद एबीवीपी के विभाग संगठन मंत्री अंशुल विद्यार्थी और छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्र ने छात्र नीरज प्रताप सिंह को जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया।
इविवि में वीसी दफ्तर के समक्ष अनशन स्थल पर विधि द्वितीय वर्ष के छात्र दुर्गेश कुमार मिश्र ने चीफ प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक दुबे के लिए अपशब्दों का प्रयोग किया और उनकी ओर झपटा। इस पर पुलिस ने उसे पकड़ लिया। चीफ प्रॉक्टर ने छात्र के खिलाफ एफआईआर के लिए कर्नलगंज थाने में तहरीर दी है। साथ ही छात्र को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। हालांकि वार्ता में मौजूद अन्य छात्रों ने आरोप लगाया कि दुर्गेश मिश्र को इविवि प्रशासन की ओर से भेजा गया था, ताकि छात्रों के आंदोलन में बांधा पहुंचाई जाए। छात्रों ने कुलपति के साथ उसकी कई फोटो वहां मौजूद जिला प्रशासन एवं पुलिस के अफसरों को भी दिखाई। हालांकि घटना से नाराज चीफ प्रॉक्टर ने कहा कि वार्ता अब अनशन स्थल पर नहीं होगी। इसके बाद सभी छात्र चीफ प्रॉक्टर के कार्यालय पहुंचे और वहां बातचीत हुई।