गर्भवती महिलाओं के साथ अब गर्भस्थ शिशु(भ्रूण) का इलाज संभव हो गया है। गर्भाशय के अंदर बच्चे की बीमारियों का पता लगाकर उपचार किए जाने की नई विधियों के बारे में स्त्री-प्रसूति रोग विशेषज्ञों को बताया गया। दिल्ली से आईं डॉ. मंदाकिनी प्रधान और डॉ. मनजीत ने फीटल मेडिसिन (पद्धति) की बारीकियों और विधि केे बारे में जानकारी दी। मेडिकल कॉलेज में ऑब्स और गॉयनी सोसायटी की तीन दिनी संगोष्ठी के पहले दिन आयोजित तकनीकी सत्र में महिलाओं से जुड़ी कई बीमारियों की जटिलताओं और उपचार के बारे में देश के कोने-कोने से आईं विशेषज्ञों ने जानकारी दी। सोसायटी की 30 वीं राज्य स्तरीय संगोष्ठी में आए प्रतिभागियों का स्वागत मेडिकल कॉलेज में स्त्री प्रसूति रोग विभाग की अध्यक्ष और आयोजन सचिव डॉ. अमृता चौरसिया ने किया। उन्होंने सोसाइटी और आयोजन के बारे में भी जानकारी दी।
मेडिकल कॉलेज के प्रीतम दास प्रेक्षागृह और पुरा छात्र एसोसिशन के लॉन में अगल-अलग हुए आयोजनों में आईवीएफ, रेरोगैसी कानून, बच्चेदानी के कैंसर समेत महिलाओं की अन्य बीमारियों पर चिकित्सकों ने अनुभव साझा किए। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. आभा मजूमदार, डॉ. उमा सिंह, डॉ. सरित श्याम सुंदर और डॉ. मंदाकिनी प्रधान ने कृतिम गर्भाधान और आईवीएफ के बारे में जानकारी दी। बताया कि अधिक उम्र में भी महिलाओं का मां बनने का सपना पूरा हो सकता है। जरूरी है कि मरीज शारीरिक रूप से स्वस्थ हो।
संचालन करते हुए डॉ. अमृता अग्रहरि ने आगरा के डॉ. केशव मेहरोत्रा और डॉ. अंजलि के साथ अन्य विशेषज्ञों के अनुभव और विशेषज्ञता बताई। डॉ. केशव ने एग फ्रीजिंग(आईवीएफ) और डॉ. अंजलि ने अधेड़ उम्र की महिलाओं में गर्भधारण की नवीनतम तकनीक का जिक्र किया। अहमदाबाद की डॉ. कांति बंसल ने डॉक्टरों के पैनल में आईवीएफ के बारे में जानकारी दी। डॉ. मंजू वर्मा और डॉ. उमा सिंह ने बच्चेदानी के ग्रीवा कैंसर के कारण और निवारण संग ठंडी सिंकाई व लीप जैसी तकनीक बताई। चिकित्सकों ने बताया कि इन विधियों से बच्चेदानी का बचाव कर कैंसर का इलाज कर सकते हैं। कार्यक्रम में डॉ. मीना दयाल, डॉ. बीना गुप्ता,डॉ. अमृता अग्रहरि, डॉ.अदिति, डॉ. सादिया, डॉ. तोषी आदि का सहयोग रहा। अन्य सत्रों के संचालन में डॉ. चित्रा पांडेय, डॉ. सबिता दीक्षित शामिल रहीं। इस मौके पर देश के कोने-कोने से आए सैकड़ों विशेषज्ञों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।