माया प्रेस की बिल्डिंग में स्थित आखाड़ा भवन ढहाए जाने के मामले में हाईकोर्ट ने नगर आयुक्त अविनाश सिंह और एसओ मुट्ठीगंज ऋषिकांत राय को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने उनसे पूछा है कि अदालत को गुमराह करने के मामले में क्यों न उन पर सीआरपीसी की धारा 340 के तहत मुकदमा चलाया जाए। कोर्ट ने भवन गिराने और वहां से लाखों रुपये के सामान की चोरी के मामले में दर्ज मुकदमे की प्रगति रिपोर्ट भी मांगी है। रिपोर्ट देखने के बाद अदालत तय करेगी कि इस मामले की जांच किसी दूसरी एजेंसी या हाईकोर्ट के अवकाश प्राप्त जज से कराने की आवश्यकता है या नहीं।
महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने इस मामले में सुनवाई के अदालत के क्षेत्राधिकार पर सवाल उठाया, जिसे मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्र ने अस्वीकार कर दिया। उन्होंने पुलिस की जांच के तरीके पर असंतोष जताया है। अदालत कोट्स ऑफ इंडिया लिमिटेड कंपनी की रिट पर सुनवाई कर रही है। मित्र प्रकाशन (माया प्रेस) के समापन की प्रक्रिया चल रही है। हाईकोर्ट के आदेश से मित्र प्रकाशन की संपत्तियों पर ऑफिशियल लिक्विडेटर नियुक्त किया गया है। इस प्रकार से सभी संपत्तियां अब कोर्ट की अधीन हैं।
इस दौरान माया प्रेस की बिल्डिंग मेें स्थित नवीन उदासीन अखाड़ा वाले हिस्से को गिराने के लिए मुख्यमंत्री के विशेष कार्याधिकारी को पत्र लिखा गया। मुख्यमंत्री कार्यालय ने नगर आयुक्त को अवैध निर्माण हटाने के लिए कहा। नगर आयुक्त ने अदालत की अनुमति लिए बिना उसके अभिरक्षा वाले भवन को गिरवा दिया। पूछने पर बताया कि उन्होंने अपना आदेश वापस ले लिया है और ध्वस्तीकरण नगर निगम ने नहीं किया। मौके से गिरफ्तार दो लोगों के बयान और ध्वस्तीकरण की सीडी से यह साफ हो गया कि ध्वस्तीकरण नगर निगम ने कराया है। एसओ मुट्ठीगंज ने भी गिरफ्तार दोनों लोगों के मामले में कोर्ट को गुमराह किया है।