इलाहाबाद(ब्यूरो)। शहरियों के लिए खुशखबरी है। दोहरी इंट्री में फंसी जमीनों का विवाद अब खत्म हो गया है। नजूल की जिस जमीन दोहरी इंट्री के तहत राजकीय आस्थान के अभिलेखों में भी दर्ज कर लिया गया था, उसे अब राजकीय आस्थान के अभिलेखों से हटाकर सिर्फ नजूल भूमि माना जाएगा और फ्रीहोल्ड भी आसानी से हो जाएगा। इसके साथ ही दखीलकारी कास्तकारी के तहत भूमि हस्तांतरण या विभाजन के लिए अब जिलाधिकारी से भी अनुमति नहीं लेनी होगी।
शहर में नजूल की सैकड़ों संपत्तियां वर्षों से दोहरी इंट्री में फंसी हुई हैं। इन संपत्तियों को राजकीय आस्थान के अभिलेखों में भी दर्ज कर लिया गया है। इसके अलावा दखीलकारी कास्तकारी की तमाम संपत्तियां ऐसी हैं, जिनके हस्तांतरण एवं विभाजन से संबंधित आवेदन जिलाधिकारी कार्यालय में काफी समय से लंबित पड़े हुए हैं। शासन की ओर से पिछले हफ्ते एक नया आदेश जारी कर इन तमाम विवादों और समस्याओं का निपटारा कर दिया गया है। शासन स्तर से आदेश जारी कर दिए गए हैं कि जो जमीन दोहरी इंट्री के तहत नजूल और राजकीय आस्थान दोनों अभिलेखों में दर्ज कर ली गई है, उन्हें नजूल की भूमि ही माना जाए और बिना किसी अड़चन के उन्हें फ्रीहोल्ड किया जाए।
शासन के इस आदेश के बाद शहर में तमाम संपत्तियों को दोहरी इंट्री के विवाद से छुटकारा मिल जाएगा। दोहरी इंट्री की जमीन को नजूल मानकर उन्हें फ्रीहोल्ड किया जा सकेगा और जमीन बसे लोग भी अवैध कब्जेदार नहीं कहलाएंगे। इसके साथ ही एक और राहत दी गई है। दखीलकारी कास्तकारी की जिन संपत्तियों पर 60 साल से किरायेदार का कब्जा है या उनका किराया नहीं बढ़ाया गया है, उन मामलों में दखीलकार कास्तकारों को जमीन के हस्तांतरण या विभाजन के लिए अब जिलाधिकारी से अनुमति लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी और न ही इसके लिए अफसरों के दफ्तर के चक्कर काटने पड़ेंगे। इस शासनादेश के जारी होने से पहले व्यवस्था में जो खामियां थी, उसके खिलाफ समाजसेवी शेखर श्रीवास्तव ने शासन स्तर तक आवाज उठाई। शेखर ने शासन के इस आदेश का स्वागत करते हुए कहा है कि इस आदेश के जारी होने से स्थानीय स्तर पर अफसरों की मनमानी पर काफी हद तक लगाम लग सकेगी और जनता को भी राहत मिलेगी।