इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के सचिव सुरेश कुमार सिंह ने मंगलवार देर शाम कार्यभार ग्रहण किया। विवादाें को देखते हुए नए सचिव को कई चुनौतियों का सामना कराना पड़ेगा। सबसे पहली चुनौती घोषित कार्यक्रम के अनुसार पीसीएस-जे मुख्य परीक्षा तथा साक्षात्कार कराना है।
आयोग में लंबे समय बाद आईएएस की सचिव पद पर नियुक्ति हुई है। काफी समय तक रिजवानुर्रहमान इस पद पर बने रहे। अनिल यादव के समय में कई वरिष्ठ अफसरों की इस पद पर नियुक्ति हुई लेकिन विवादों को देखते हुए उन्होंने ज्वाइन नहीं किया। जिन्होंने ज्वाइन किया वे ज्यादा दिन नहीं टिके। अब हाईकोर्ट के आदेश पर आईएएस सुरेश कुमार सिंह की नियुक्ति की गई है। आदेश के एक सप्ताह बाद उन्होंने मंगलवार देर शाम ज्वाइन किया।
आयोग की भर्तियों को लेकर लगातार विवाद बना हुआ है। भर्तियों की सीबीआई जांच समेत कई याचिकाएं हाईकोर्ट में लंबित हैं। इन विवादों के बीच अनिल यादव की अध्यक्ष पद पर नियुक्ति रद्द कर दी गई है। ऐसे में आयोग सचिव के सामने आयोग की साख तथा प्रतियोगियों का भरोसा फिर से बहाल करने की चुनौती होगी। विवादित फैसलों के बीच आयोग की कार्यशैली भी कटघरे में है। इसमें सुधार करने की चुनौती होगी। इन्हीं विवादों के बीच 26 अक्तूबर से पीसीएस-जे मुख्य परीक्षा है। इसके बाद 28 अक्तूबर से साक्षात्कार शुरू होंगे।
सचिव के समक्ष इन परीक्षाओं को संपन्न कराने तथा शुचिता बनाए रखने की चुनौती होगी। सचिव का पदभार ग्रहण करने के साथ ही सुरेश ने पारदर्शिता की बात कही लेकिन आयोग चयनितों का नाम भी नहीं बताता। इसके अलावा भी कई फैसलों की मदद से रिजल्ट पर परदा डाल दिया गया है। ऐसे में वह पारदर्शिता के वादा पूरा करने में कितना सफल हो पाते हैं इसे लेकर सवाल बना हुआ है। सुरेश का कहना है कि नियमों पालन तथा निष्पक्षपतापूर्वक काम करना ही उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने कर्मचारियों से भी नियमों के तहत तथा समयबद्ध तरीके से काम करने की अपील की।
लोक सेवा आयोग के सचिव बनाए गए सुरेश कुमार इलाहाबाद के ही करछना में सोनाई गांव के हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक तथा परास्नतक सुरेश 1987 में एसडीएम पद पर चयनित हुए थे। इससे पहले 1985 में मध्य प्रदेश पीसीएस में भी एसडीएम पद पर चयनित हुए थे। 2005 में आईएएस कैडर में प्रमोशन हुआ।
भारतीय जन किसान पार्टी की मंगलवार को हुई बैठक में अनिल यादव के कार्यकाल में लोक सेवा आयोग में हुईं भर्तियां निरस्त करने की मांग की गई। सदस्यों ने अनिल यादव को बचाने के लिए पैरवी में हुए खर्च की जांच की भी मांग की। बैठक में महासचिव राज नारायण मिश्र, लक्ष्मी प्रसाद सिंह, होरीलाल निषाद आदि मौजूद रहे।