वॉशिंग लाइन में अब महज पांच मिनट में ही ट्रेनों की सफाई हो जाएगी। इस दौरान ट्रेनों की साफ सफाई में खर्च होने वाले पानी की भी काफी बचत होगी। अभी एक कोच की धुलाई में औसतन एक हजार लीटर पानी खर्च होता है लेकिन उत्तर मध्य रेलवे में अब एक कोच की धुलाई में सौ लीटर ही पानी खर्च होगा। यह संभव होगा ऑटोमेटिक कोच वॉशिंग प्लांट से। इस तरह के एक प्लांट का उद्घाटन जीएम एनसीआर राजीव चौधरी ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से शनिवार को किया।
एनसीआर में पहली बार आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर ऑटोमेटिक कोच वॉशिंग प्लांट का उद्घाटन करने के बाद जीएम ने कहा कि अब प्रयागराज जंक्शन, कानपुर सेंट्रल, झांसी, ग्वालियर आदि स्टेशनों पर भी इस तरह का प्लांट लगाया जाएगा। दरअसल अभी वॉशिंग लाइन में ट्रेनों के बाहरी हिस्से की मैनुअली सफाई होती है। इसमें समय तो ज्यादा लगता ही है साथ ही पानी भी काफी खर्च हो जाता है। लेकिन ऑटो मेटिक कोच वॉशिंग प्लांट से 24 कोच की ट्रेन की सफाई महज पांच मिनट में ही हो जाएगी।
एनसीआर के सीपीआरओ अजीत सिंह ने बताया कि इस मशीन में सेंसर लगा है। सेंसर इसके चलने का सही समय निर्धारित करता है। मशीन में बेलनाकार ब्रश, क्लीनिंग केमिकल की मदद से अधिकतम आठ किमी की रफ्तार से चल रही ट्रेन की सफाई की जा सकती है। यह स्वचालित कोच वाशिंग प्लांट पानी की खपत को काफी कम कर देता है । क्योंकि पारंपरिक सफाई प्रक्रिया में प्रति कोच लगभग 1000 लीटर खपत के मुकाबले बाहरी सफाई के इस मशीन द्वारा प्रति कोच केवल 300 लीटर पानी की आवश्यकता होती है।
इसका इनबिल्ट एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट इस मशीन में उपयोग किए जाने वाले लगभग 80 फीसदी पानी को रीसाइकिल कर देता है। इससे पानी की खपत काफी कम हो जाती है। यानी कि एक कोच में महज 100 लीटर पानी ही इसके माध्यम से खर्च होगा। इसके अलावा जीएम ने झांसी स्टेशन के पास स्थापित प्लग एंड प्ले टाइप पैकेज्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का भी उद्घाटन किया।