सिविल लाइंस व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने जीएसटी के नाम पर व्यापारियों का उत्पीड़न किए जाने के विरोध में अपनी आवाज बुलंद की। बड़ी संख्या में व्यापारियों ने एडिशनल कमिश्नर ग्रेड वन जीएसटी को ज्ञापन सौंपा।
सिविल लाइंस व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने जीएसटी के नाम पर व्यापारियों का उत्पीड़न किए जाने के विरोध में अपनी आवाज बुलंद की। अध्यक्ष सुशील खरबंदा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में व्यापारियों ने एडिशनल कमिश्नर ग्रेड वन जीएसटी को ज्ञापन सौंपा। व्यापारियों ने कहा कि शासन के द्वारा निर्धारित मानकों के तहत ही कार्रवाई और सर्वे किया जाए। इसके विपरीत कार्य किया गया तो व्यापार मंडल के लोग आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
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कहा कि सिविल लाइंस व्यापार मंडल के द्वारा जीएसटी संग्रह में एक बड़ी धनराशि जीएसटी के रूप में प्रदान की जाती है। व्यापारी सम्मान और सहयोग की अपेक्षा करते हैं लेकिन अधिकारियों के द्वारा नियमों के विपरीत जाकर व्यापारियों का उत्पीड़न किया जाता है जो कि बर्दाश्त के बाहर है। शासन के नियमों का व्यापारी पालन करते हैं और समय समय पर निर्देशों का अनुपालन करते हैं। शासन की मंशा व्यापारियों के उत्पीड़न की कभी नहीं रही है। छोटे अधिकारियों के द्वारा तरह तरह के नए नियमों का हवाला देकर उत्पीड़न और सर्वे किया जाता है।
व्यापारियों से ज्ञापन लेने के बाद वाणिज्य कर विभाग की एडिशनल कमिश्नर ग्रेड वन ज्योत्सना पांडेय ने कहा कि व्यापारियों को भयभीत होने की जरूरत नहीं है। शासन से जो सूची प्राप्त हुई है। उसमें सर्वे ही किया जाना है और ऐसे व्यापारियों की संख्या तकरीबन 100 के ही आसपास है। इसलिए सभी व्यापारियों को डरने की जरूरत नहीं है। इस मौके पर अध्यक्ष सुशील खरबंदा, अमित अग्रवाल, शिवशंकर सिंह, संजय गुप्ता आदि मौजूद रहे।