नए पुल पर जाम से मुक्ति, टोल प्लाजा को बंद करने आदि मांगों को लेकर सोमवार को सपाइयों ने धरना-प्रदर्शन किया। करछना के विधायक उज्ज्वल रमण सिंह की अगुवाई में कार्यकर्ताओं के जमावड़ा से पुल पर जाम लग गया था तथा वाहनों की लंबी कतार लग गई थी। इससे लोगों की भी परेशानी बढ़ गई थी। सपा विधायक का कहना था कि टोल प्लाजा पर पुल निर्माण की लागत से ज्यादा की वसूली की जा चुकी है। इसलिए टोल बूथ बंद कर देना चाहिए। ताकि, टोल के साथ लोगों को शहर और पुल पर लगने वाले जाम से भी निजात मिल सके। विधायक ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन भी एसडीएम को सौंपा।
शहर के साथ यमुनापार में लगने वाले जाम से निजात दिलाने के लिए सोमवार को सपाइयों ने आवाज बुलंद की। शाम चार बजे बड़ी संख्या में नए पुल पर पहुंचे कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन किया। विधायक का कहना था कि टोल प्लाजा के चलते शहर के साथ यमुनापार में जाम की समस्या आए दिन बनी रहती है। मिर्जापुर, रीवां मार्ग पर चार-चार किलोमीटर वाहनों की लंबी कतार लगी रहती है। ऐसे में छोटे वाहन रेंगते हुए चलते हैं। उनका कहना था कि टोल प्लाजा पर लागत से अधिक करीब 15 सौ करोड़ रुपये की वसूली की जा चुकी है। उन्होंने ट्रक चालकों को परेशान करने का भी आरोप। मांग पूरी नहीं होने पर जेल भरो आंदोलन की चेतावनी दी। विधान सभा में भी यह मुद्दा उठाने की बात कही। पार्टी के प्रदेश सचिव दुर्गा प्रसाद गुप्ता ने कहा कि भाजपा सरकार का तानाशाही रवैया सपाई बर्दाश्त नहीं करेगें। दो घंटे के धरने के बाद सपाइयों ने एसडीएम कुलदेव सिंह को ज्ञापन सौंपा। धरना देने वालों में जिलाध्यक्ष कृष्ण मूर्ति सिंह यादव, मदन मोहन द्विवेदी, विनय कुशवाहा, राजेश्वर पांडेय, सुहैब खां, बब्बू गौतम, राजेश गुप्ता, नकुल निषाद, मंजू यादव, लल्लन सिंह यादव, पप्पू निषाद, अनिल यादव, संदीप यादव, योगेन्द्र सिंह, राम मिलन यादव, देव शंकर दुबे, नरेन्द्र सिंह, पंकज यादव, राजू सिंह ठेकेदार, रंदीप शर्मा, प्रमिल यादव, पप्पू यादव, समीर पांडेय, इमरान बीडीसी, विमल निषाद, मोहित पांडेय आदि शामिल रहे।
लोकसभा चुनाव से पहले राज्यसभा सदस्य रेवती रमण सिंह और विधायक पुत्र उज्ज्वल रमण सिंह के अचानक सक्रिय होने से समाजवादी पार्टी के भीतर की सियासत में भी हलचल पैदा हो गई है। इसे लोकसभा चुनाव में उज्ज्वल की दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है। गौर करने वाली बात यह भी है कि पार्टी और इलाहाबाद की राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले इन नेताओं की अगुवाई में हुए आंदोलन से एक वर्ग ने दूरी बना ली है। रेवती रमण या उज्ज्वल के लोकसभा चुनाव लड़ने की सुगबुगाहट अविरल गंगा के मुद्दे पर आंदोलन की घोषणा से ही हो गई है। रेवती रमण सिंह ने बांध पर एक दिवसीय धरना दिया था। इसके बाद पेट्रोल और डीजल के मूल्यों में बढ़ोतरी के खिलाफ उन्होंने सुभाष चौराहा पर धरना दिया। इसी क्रम में विभिन्न मुद्दों पर लेकर रेवती रमण की अगुवाई में कलेेक्ट्रेट पर भी धरना दिया गया था। अचानक इस तरह से एक के बाद एक आंदोलन से रेवती रमण के लोकसभा चुनाव लड़ने की संभावना जताई जा रही है लेकिन वह राज्यसभा सदस्य भी हैं। ऐसे में विधायक उज्ज्वल रमण के चुनाव लड़ने की भी चर्चा है। अब उज्ज्वल रमण की अगुवाई में सोमवार को हुए आंदोलन से इस चर्चा को और बल मिला है।