शहर के एक निजी स्कूल की प्रिंसिपल-शिक्षिकाओं एवं प्रबंधन के बीच स्वतंत्रता दिवस पर होने वाले कार्यक्रमों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रधानाध्यापिका एवं शिक्षिकाओं की ओर से 15 अगस्त को होने वाले कार्यक्रमों में राष्ट्रगान, वंदेमातरम, सरस्वती वंदना आदि को शामिल किए जाने को स्कूल के प्रबंधक ने मजहबी मानते हुए इजादत देने से मना कर दिया। स्कूल प्रबंधन की मनमानी से नाराज प्रधानाध्यापिका समेत आठ शिक्षिकाओं ने स्कूल छोड़ दिया है।
सादियाबाद, बघाड़ा में एमए कान्वेंट स्कूल के प्रबंधक जियाउल हक की ओर से स्वतंत्रता दिवस पर होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा पर आपत्ति उठाने के बाद शिक्षक और प्रबंधन आमने-सामने आ गए हैं। प्रधानाध्यापिका का आरोप है कि प्रबंधक जियाउल हक अपने स्कूल में कभी राष्ट्रीय पर्व पर राष्ट्रगान एवं राष्ट्रगीत नहीं होने देते। अबकी बार फिर जब 15 अगस्त पर होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा बनी तो उन्होंने इसका विरोध किया। उन्होंने राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, सरस्वती वंदना सहित किसी भी प्रकार के पूजन की इजाजत से इनकार कर दिया।
‘अमर उजाला’ से बातचीत में भी प्रबंधक जियाउल हक अपनी बात पर अड़े रहे। कहा, मेरे स्कूल में राष्ट्रगान कभी नहीं होता, मैं इसे नहीं मानता। राष्ट्रगान की कई लाइनें मजहब और खुदा से बड़ी कही गई है, इसीलिए मैं राष्ट्रगान नहीं मानता। राष्ट्रगान में ‘भारत भाग्य विधाता’ को खुदा से ऊपर बताया गया है। मुल्क खुदा से बड़ा नहीं है। वंदे मातरम में भी पूजन की बात की गई है, सरस्वती पूजन भी धर्म विशेष के बच्चों के खिलाफ है। इसीलिए मैंने कार्यक्रम पर रोक लगाई है।
‘‘शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रीय पर्वों स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस सहित गांधी जयंती पर राष्ट्रगान, राष्ट्रीय गीत कराना अनिवार्य है। ऐसे में कोई भी स्कूल यह नहीं कह सकता कि वह राष्ट्रगान को नहीं मानता। स्कूलों में राष्ट्रीय आयोजन के साथ शैक्षिक कार्यक्रम भी होेने चाहिए। यदि किसी स्कूल में इस प्रकार की शिकायत मिलती है तो उसे दूर करने की कोशिश की जाएगी। नहीं मानने की स्थिति में कार्रवाई भी होगी।’’
0 जयकरन यादव, बीएसए