श्रृंग्वेरपुरधाम पीठाधीश्वर महंत रामप्रसाद दास शास्त्री महाराज ने कहा कि सनातन धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। जिसमें साक्षात देवी देवताओं का वास होता है। सनातन धर्म के कर्मकांडों से लेकर पवित्र त्योहारों में भी गाय का गोबर और मूत्र का प्रयोग करके विधि विधान पूर्वक पूजन पाठ कराया जाता है।
आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर के लड्डू प्रसादम में गाय और अन्य जानवरों की चर्बी और मछली तेल के इस्तेमाल के मामले में संतों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भगवान श्रीराम की कर्म भूमि और ऋषि श्रृंगी की तपोभूमि श्रृंग्वेरपुरधाम में साधु संत समाज, श्रृंग्वेरपुर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, श्री तुलसी साहित्य प्रचार समिति के पदाधिकारियों की श्रीराम संध्या मठ में हुई बैठक में प्रसादम में मिलावट को सनातन धर्मियों की आस्था पर चोट बताया गया। संतों ने कहा कि प्रसादम में चर्बी होने की बात सही निकली है। यह सनातन धर्मवलंबियों के लिए सोचनीय एवं चिंता का विषय है। इसकी जांच करके आरोपी को कड़ा दंड मिले।
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श्रृंग्वेरपुरधाम पीठाधीश्वर महंत रामप्रसाद दास शास्त्री महाराज ने कहा कि सनातन धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। जिसमें साक्षात देवी देवताओं का वास होता है। सनातन धर्म के कर्मकांडों से लेकर पवित्र त्योहारों में भी गाय का गोबर और मूत्र का प्रयोग करके विधि विधान पूर्वक पूजन पाठ कराया जाता है। गौ की चर्बी या मछली के तेल का प्रयोग भगवान बालाजी के प्रसाद में करना सनातम धर्म पर आघात है।
श्रृंग्वेरपुर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष अरुण द्विवेदी ने कहा कि राष्ट्रीय सनातन रक्षक बोर्ड का गठन होना चाहिए। बालाजी भगवान हमारी आस्था के केंद्र के साथ ही हमारे हृदय में बसते हैं। धर्म के विरुद्ध यदि गलत कार्य किया जाएगा तो यह न तो संविधान के अनुसार सही होगा और न ही करोड़ों सनातनियो के आस्था के अनुसार सही होगा। सनातन प्रेमियों के लिए यह मुद्दा केवल गौ मांस का ही नहीं है, बल्कि सनातन की उत्पत्ति से लेकर वर्तमान तक सनातन धर्म को मानने वाले लोगों पर कड़ा प्रहार है।
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पातालपुरी के महंत मानस बाबा ने सनातन धर्मावलंबियों को इस पर विचार करने को कहा है। बताया कि अब समय आ गया है कि सनातनी लोग अपनी आस्था को पुनः साबित करें। इस अवसर पर पप्पू त्रिपाठी, मुन्ना सोनी, राजकुमार त्रिपाठी, रामबरन, गोद्धान त्रिपाठी, रंजीत निषाद समेत अन्य लोग उपस्थित रहे।