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बंधी आस, रिश्तों को सेकेंड चांस

Fri, 22 Jan 2016 01:07 AM IST
सुरभि गुप्ता, अमर उजाला ब्यूरो/इलाहाबाद
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लड़ाई झगड़े, गिले शिकवे तो हर रिश्ते में होते हैं, लेकिन इसका यह मतलब तो नहीं कि रिश्तों से मुंह मोड़ लिया जाए। छोटी-छोटी बातों को मुद्दा बनाकर रिश्ता तोड़ने से जिंदगी में खुशियां भी मुंह मोड़ लेती हैं। ऐसी ही तमाम नसीहतों के बीच परिवार न्यायालय के मीडिएशन काउंसलिंग में जनवरी 2015 से अब तक 162 जोड़ों ने अपने रिश्ते को ‘सेकेंड चांस’ दिया। दूर रहने के बाद साथी की अहमियत का अहसास हुआ और एक-दूसरे की गलतियों को भूलकर साथ रहने का वायदा किया। मीडिएशन काउंसिलिंग में पहुंचे तलाक, विदाई और भरण-पोषण से संबंधित तकरीबन 300 मामलों में से162 में समझौता हुआ।
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झगड़े के बाद जो दंपति अलग-अलग रह रहे थे उन्हें दूरियों ने एक-दूसरे की अहमियत का अहसास करा दिया।  काउंसलर्स का कहना है कि दंपतियों को समझाया जाता है कि ताकि वे एक-दूसरे की गलतियों से नहीं बल्कि अच्छाइयों से प्यार करें। जो रिश्ते एक बार जुड़ जाते हैं उनका टूटना बहुत मुश्किल होता है और जब टूटते हैं तो उसकी टीस जिंदगी भर रहती है।
मीडिएशन काउंसलिंग में समझौते की वजह वर्षों से न्यायालय में चल रहे मुकदमें भी है। वर्षों तक कोर्ट के चक्कर लगा-लगाकर दोनों ही पक्ष परेशान रहे। ऐसे में सुलह के लिए मामले मीडिएशन में पहुंचे तो पति-पत्नी दोनों ही पक्षों ने तत्परता दिखाई। काउंसलर्स की मेहनत रंग लाई और कई मामलों में समझौते हुए।
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छोटी-छोटी बातों को तिल का ताड़ बनाने से बेहतर है कि एक-दूसरे को अच्छे से समझने का मौका दें। जिंदगी में सब कुछ नहीं मिलता है। मीडिएशन की काउंसलर प्रतिभा मिश्रा कहती हैं, एक-दूसरे से बेहद प्यार करने के बाद भी झगड़ा हो जाने पर अहम की वजह से लोग पहल नहीं करते हैं। ऐसे में दोनों के बीच बढ़ती दूरियां आगे चलकर खाई बन जाती है। पति पत्नी को समझाया जाता है कि रिश्तों को समझें, उनकी भावनाओं की कद्र करें। रिश्तों को तोड़ने की अपेक्षा उन्हें निभाएं। गलती होने पर उसे माफ करें। ज्यादातर जोड़ों में परिवार को लेकर झगड़ा होता है इसलिए एक-दूसरे के परिवार वालों की कद्र करें। परिपक्वता के साथ रिश्तों को निभाएं।
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