महिला छात्रावासों में रहने वाली लड़कियों की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट सख्त है। एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए अदालत ने डीएम इलाहाबाद से पूछा है कि महिला छात्रावासों में सुरक्षा के क्या उपाय किए गए हैं। डीएम से उठाए गए कदमों की चार सप्ताह में जानकारी मांगी है।
कोर्ट ने कहा कि यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह छात्राओं की सुरक्षा का इंतजाम करे, ताकि वह भयमुक्त होकर अपनी शिक्षा पूरी कर सकें। कोर्ट ने डीएम से 22 फरवरी को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा है। इसी दिन याचिका पर सुनवाई होगी। कुछ विधि छात्राओं की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति विजय लक्ष्मी की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।
याचिका में 11 जनवरी को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के गर्ल्स हास्टल में रहने वाली एक छात्रा के साथ हुई घटना का मामला उठाया गया। याची का कहना है कि छात्राओं के साथ आए दिन छेड़छाड़ की घटनाएं होती हैं। कैंपस से लेकर सड़क तक सुरक्षा की कहीं भी व्यवस्था नहीं है। मांग की गई है कि इविवि परिसर में सीसीटीवी कैमरा लगाए जाएं। सभी कालेजों और शैक्षणिक संस्थाओं में जहां छात्राएं पढ़ रही हैं उसके आसपास सादी वर्दी में पुलिस कर्मियों की तैनाती की जाए। महिला छात्रावासों के आसपास महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाए। याचिका में अध्यापकों, पुलिस अधिकारियों और छात्राओं की एक समिति बनाकर सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी की जाए।
उल्लेखनीय है कि 11 जनवरी को इविवि के महिला छात्रावास में रहने वाली एक छात्रा हास्टल से बाहर सब्जी खरीदने निकली थी। उसी वक्त कुछ अराजकतत्वों ने उसे जबरदस्ती स्कार्पियो में खींचने और अपहरण का प्रयास किया। विरोध करने पर तमाम लोग एकत्र हो गए, जिससे छात्रा बच गई। उसकी मदद को आए उसके भाई को अगले दिन अराजकतत्वों ने मारपीटकर अधमरा कर दिया था। याचिका में इस घटना का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि छात्राओं के साथ सरेआम आपराधिक घटनाएं हो रही हैं। इसकी रोकथाम की जानी चाहिए।