एक महीने के भीतर हुई इन तीन मौतों को लेकर पूरे गांव में कोहराम मच गया। परिवार के पांच अन्य सदस्यों के भी पैरों में सूजन और शरीर में दर्द होने से उनको मऊआईमा की सीएचसी पर ले जाया गया। वहां अधीक्षक डॉ. राम गोपाल वर्मा ने उपचार शुरू करा दिया, लेकिन जब हालत बिगड़ने लगी और पीड़ितों में बीमारी की वजहों को साझा किया, तब इसकी जानकारी सीएमओ को दी गई।
एसआरएन में 24 घंटे की जा रही निगरानी
फिर वहां से इस बीमारी से जान गंवाने वाले सहदेव के पुत्रों रामकुमार (35), इंद्रकुमार (25), बहू ललिता देवी (40) के अलावा दो बच्चों आयुष(5), महक (3) को स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल में भर्ती कराया गया। एसआरएन में रामकुमार और इंद्र कुमार की हालत गंभीर बनी हुई है। उन्हें आईसीयू में रखा गया है। मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह के निर्देशन में इन ड्रॉप्सी पीड़ित रोगियों की 24 घंटे निगरानी के लिए चार चिकित्सकों की टीम लगाई गई है। इसमें डॉ. जितेंद्र शुक्ला के अलावा किडनी विशेषज्ञ डॉ. सना,हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक सचदेवा, डॉ. अभिषेक सिंह को लगाया गया है। इस मरीजों का उपचार करने वाले डॉ. जितेंद्र ने बताया कि दो मरीजों के पैरों में सूजन अधिक थी। अब धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। सांस भी अब पहले जैसी नहीं फूल रही है।
मऊ आइमा में डॉप्सी की बीमारी एक परिवार के कुछ सदस्यों में फैलने की जानकारी मिली है। अभी मेरे पास जांच के लिए ऊपर से पत्र नहीं आया है। आदेश मिलने के बाद इस बीमारी से जुड़े हर पहलू की जांच कराई जाएगी। डॉ. कृष्ण कुमार वर्मा, अपर निदेशक सवास्थ्य।
ईश्वर की कृपा ही कही जाएगी कि इस बीमारी को फैलने से रोक लिया गया। वरना यह महामारी का रूप धारण कर सकती थी। एक ही परिवार ने इस तरह के जहरीले तेल का सेवन किया था। डॉ. आशु पांडेय, सीएमओ।
डॉप्सी पीड़ित मरीजों को सघन चिकित्सा कक्ष में रखा गया है। उनके उपचार में किसी तरह की कोताही न रह जाए, इसलिए वह खुद मानीटरिंग कर रहे हैं। सभी दवाएं स्टोर से मुफ्त में मुहैया कराई जा रही हैं। खून भी चढ़वाया गया है, ताकि उनका जीवन बचाया जा सके। डॉ. एसपी सिंह, प्राचार्य- मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज।