एक अक्तूबर की सुनवाई के दौरान पेश की गई जानकारी आधी-अधूरी थी। इससे खफा कोर्ट ने तीन अक्तूबर को प्रयागराज के डीएम, विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी व अधिशासी अभियंता वितरण एवं सर्कुलेशन डिवीजन विद्युत विभाग को तलब किया है। जमीन अधिग्रहण करने के बाद पावर प्लांट लगाने की जम्मेदारी जेपी समूह को दी गई थी।
उस दौरान पावर प्लांट में प्रभावित ज्यादातर किसानों को उनके जमीन का भुगतान सरकार ने कर दिया। लेकिन, कुछ किसान मुआवजा नहीं लिए। यहां प्लांट लगाने की तैयारी तेजी से की जा रही थी। इसे लेकर गांव के सामने एक हेलिपैड व कचरी गांव के सामने पुलिस चौकी का निर्माण कराया गया।
पावर प्लांट स्थापित व भूमि पूजन के लिए जेपी समूह के जेपी गौड़ व अन्य अधिकारी यहां आए थे। उस दौरान किसानों ने जेपी समूह के अधिकारियों से पावर प्लांट के बारे में जानकारी। वहीं, नौकरी व अन्य सुविधाओं के बारे में जानना चाहा। लेकिन, जेपी समूह से आए अधिकारियों ने प्राइवेट कंपनी होने की बात कहकर नौकरी व अन्य सुविधा देने से इन्कार कर दिया। इसके बाद 29 किसानों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।