चैत्र नवरात्र शुक्रवार आठ अप्रैल से शुरू होगा। सिद्धपीठों, मंदिरों और घरों में देवी की खास पूजा अर्चना की जाएगी। कलश स्थापना के साथ देवी उपासना का पर्व रामनवमी तक जारी रहेगा। नवरात्र व्रत का पारण शनिवार को होगा। अष्टमी तक व्रत करने वाले रामनवमी को ही पारण करेंगे।
इस बार नवरात्र आठ दिन के हैं। पंचमी तिथि की हानि होने से चतुर्थी के साथ पंचमी का व्रत पूजन किया जाएगा। मीरापुर स्थित सिद्धपीठ ललिताधाम, अलोपशंकरी धाम और कल्याणी देवी मंदिर में नवरात्र के दिनों में देवी की विशेष उपासना की जाएगी। मंदिरों की व्यवस्था समितियों की ओर से खास तैयारियां की गई है। ललिता देवी मंदिर में हरिमोहन वर्मा की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक का संचालन धीरज नागर ने किया। संयोजक सुमित श्रीवास्तव ने बताया देवी का हर दिन अलग शृंगार होगा। बर्फ से गुफा बनाई जाएगी। मंदिर समिति के सदस्य हर जगह मुस्तैद रहेंगे।
कलश स्थापना का अभिजित मुहूर्त शुक्रवार की दोपहर 11.37 से 12.30 तक का है। अखिल भारतीय ज्योतिष परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री अविनाश राय के मुताबिक चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा बृहस्पतिवार की शाम 4:51 के बाद आरंभ होकर शुक्रवार की दोपहर 2:26 तक रहेगी। शुक्रवार की सुबह वैधृति योग है जिसमें कलश स्थापना शुभ नहीं है। स्थापना सुबह 11:38 से दोपहर 2:26 के बीच शुभकारी है।
मां को लाल रंग विशेष प्रिय है। लाल रंग ऊर्जा का प्रतीक है। यही वजह है कि पूजन सामग्री से लेकर मां का चोला तक लाल रंग का होना चाहिए। आचार्य पुरोहित विद्याकांत पांडेय बताते है कि दुर्गा दुर्गति नाशिनी हैं। देवी को लाल चुनरी के साथ लाल सिंदूर, लाल चंदन, लाल गुड़हल का फूल चढ़ाने विशेष पुण्य फल मिलता है। दुर्गा सप्तशती के पाठ के साथ ही कामना पूर्ति के लिए दस महाविद्या, श्री तारा मांतगी, श्रीधूमावती, श्री बगलामुखी, श्री षोडसी, श्री भुवनेश्वरी, श्री छिन्नमस्ता, श्री कमला, त्रिपुर भैरवी की पूजा का विधान है।