इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किरायेदार और मकान मालिक के बीच लंबित बेदखली के मुकदमे में किसी तीसरे पक्षकार की दखल जरूरी नहीं है। भले ही तीसरा पक्षकार संबंधित मकान पर खुद मालिकाना हक का दावा करता हो। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ ने अलीगढ़ से जुड़े मामले में तीसरे व्यक्ति को मुकदमे में पक्षकार बनाए जाने की मांग खारिज कर दी।
मामला दुकान की बेदखली और किराये की बकाया राशि से संबंधित था। वादी ने पांच सितंबर 2017 की बिक्री विलेख के आधार पर दुकान पर अपना मालिकाना हक बताते हुए किरायेदार से दुकान खाली कराने की मांग की थी। वहीं, याची ने खुद को मुकदमे में पक्षकार बनाए जाने की मांग करते हुए दावा किया कि उसके पास 19 जून 2017 का बिक्री विलेख है। आरोप था कि बाद की बिक्री विलेख उसके साथ धोखाधड़ी करके हासिल की गई। इस बिक्री विलेख को निरस्त कराने के लिए उसने वर्ष 2018 में अलग से मूल वाद भी दाखिल कर रखा है, जो अभी लंबित है।