मुठभेड़ में बदमाशों से बरामद हुई बाइक।
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खरगोश दिखाने के बहाने ले गए थे
खरगोश दिखाने के बहाने ले गए साथपुलिस अफसरों के मुताबिक, हत्यारोपियों ने पूछताछ में बताया कि शाम चार बजे के करीब सुखदेव भतीजे गणेश को साथ लेकर व्यापारी की दुकान के पास पहुंचा था। वहां शुभ को दोनों ने अपने पास बुलाया और कहा कि वह जंगल की ओर जा रहे हैं। कहा कि हमारे साथ चलो तो तुम्हें खरगोश दिला देंगे। ड्राइवर का भाई होने व घर में आने-जाने के कारण शुभ सुखदेव काे पहचानता था, ऐसे में वह उसके साथ जाने को राजी हो गया। दोनों उसे लेकर चल दिए जहां रास्ते में एक अन्य आरोपी संजय मिला। इसके बाद तीनों उसे लेकर जंगल में पहुंच गए।
शंकरगढ़ में व्यापारी के पुत्र का अपहरण कर हत्या करने वाला बदमाश पुलिस मुठभेड़ में घायल।
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व्यापारी के फोन काटने पर डर गए थे अपहर्ता
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि जंगल में पहुंचने के बाद सुखदेव ने व्यापारी के पास फोनकर फिरौती मांगी। शाम करीब सात बजे पहले दो बार कॉल की लेकिन व्यापारी ने फोन नहीं उठाया। रात करीब आठ बजे व्यापारी ने कॉल बैक किया तो उसने फिरौती की रकम मांगी। कहा कि बेटे को सही सलामत चाहते हो तो 15 लाख रुपये लेकर बरगढ़ जंगल में आ जाओ।
इतना सुनते ही व्यापारी घबरा गया और फोन काट दिया। फिर करीब आधे घंटे तक कोई बात नहीं हुई, जिस पर वह व उसके साथी डर गए। उन्हें लगा कि व्यापारी ने उनकी आवाज पहचान ली है और अब वह पकड़े जाएंगे। इसके बाद ही उन्होंने शुभ की हत्या कर दी। उधर पुलिस के पास पहुंचने के बाद पिता ने कई बार फोन किया लेकिन अपहर्ताओं ने कॉल नहीं रिसीव की।
मुठभेड़ में घायल बदमाश।
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पिता ने आवाज के आधार पर जताया था शक
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, फिरौती की रकम के लिए कॉल आने के दौरान ही व्यापारी को आवाज जानी-पहचानी लगी थी। उसने पुलिस को यह बात बताई भी थी। पुलिस ने उस नंबर को सर्विलांस पर लगाया तो सुखदेव का नाम सामने आया। पूछताछ में व्यापारी ने बताया कि वह उसके ड्राइवर का भाई है। जो अक्सर अपने भतीजे गणेश के साथ आता था। इसके बाद ही पुलिस ने गणेश को पकड़ा और फिर दोनों अन्य हत्यारोपियों काे भी दबोच लिया।
व्यापारी के बेटे का शव मिलने के बाद छानबीन करती पुलिस।
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पांच टीमें, आठ घंटे तक चला ऑपरेशन
मामले में पुलिस की पांच टीमें लगातार आठ घंटे तक ऑपरेशन में लगी रहीं तब जाकर घटना का खुलासा और हत्यारोपियों की गिरफ्तारी हुई। डीसीपी यमुनानगर अभिनव त्यागी इस ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे थे। एसीपी बारा संतोष कुमार सिंह के नेतृत्व में दो, जबकि एसओजी यमुनापार प्रभारी रणजीत सिंह, एसओ मेजा राजेश कुमार उपाध्याय, एसओ शंकरगढ़ मनोज कुमार सिंह के नेतृत्व में एक-एक टीमें लगी थीं।
एसीपी के नेतृत्व में लगी टीमों ने जहां कुछ ही घंटों में आरोपियों को चिह्नित किया, वहीं अन्य तीनों टीमों ने उन्हें गिरफ्तार करने में सफलता पाई। इससे पहले पुलिस आयुक्त रमित शर्मा खुद पर्यवेक्षण में लगे रहे। वह लगातार खुलासे में लगी टीमों को दिशा-निर्देश देते रहे। मुठभेड़ के बाद सुबह पुलिस आयुक्त घटनास्थल पर भी पहुंचे और निरीक्षण किया।
किशोर का शव मिलने के बाद मौके पर मौजूद पुलिस
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मां-बाप का इकलौता बेटा था शुभ
शुभ मां-बाप का इकलौता बेटा था। उसकी एक छोटी बहन ट्विंकल है। शुभ सातवीं कक्षा में पढ़ता था। समय मिलने पर पिता के साथ दुकान पर भी चला जाता था। पिता ने पुलिस को यह भी बताया कि शनिवार को शाम चार बजे के करीब दुकान का सामान आया था। वह सामान उतरवाने लगे थे जबकि बेटा दुकान पर ही था। सामान उतरवाकर वह वापस आए तो बेटा नहीं मिला। उन्होंने सोचा कि कुछ देर में आ जाएगा। बहुत देर होने लगी तो उन्हें चिंता हुई। इसके बाद ही खोजबीन शुरू की गई।