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यूपी : पशु आहार घोषित नमकीन की इंसानों के लिए बिक्री पर तीन साल में भी रिपोर्ट नहीं, हाईकोर्ट खफा

Thu, 31 Aug 2023 05:39 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

वर्ष 2020 में अमर उजाला में प्रकाशित इस खबर का हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति समित गोपाल की पीठ ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया था। अब कोर्ट ने लेटलतीफी पर नाराजगी जताते हुए चार अक्तूबर तक जवाबी हलफनामा मांगा है।
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court - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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नामी कंपनियों की पशु आहार घोषित नमकीन की दोबारा पैकिंग करके स्थानीय बाजार में खपाने वाले धंधेबाजों की बरेली प्रशासन तीन साल में भी इलाहाबाद हाईकोर्ट को पूरी जानकारी नहीं दे सका। वर्ष 2020 में अमर उजाला में प्रकाशित इस खबर का हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति समित गोपाल की पीठ ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया था। अब कोर्ट ने लेटलतीफी पर नाराजगी जताते हुए चार अक्तूबर तक जवाबी हलफनामा मांगा है।

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फिलहाल, प्रकरण की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति समित गोपाल की खंडपीठ कर रही है। कोर्ट ने बरेली से अमर उजाला में 21 फरवरी 2020 को प्रकाशित खबर का संज्ञान लिया था, जिसमें कहा गया था कि हल्दीराम, बीकानेरी, बीकाजी, पारले, बालाजी, क्रेक्स जैसी नामी कंपनियां की रिजेक्टेड नमकीन को कुछ धंधेबाज मिक्स नमकीन बनाकर बाजार में खपा रहे हैं। दीपावली के दौरान प्रशासन की छापेमारी में आधा दर्जन कारखानों में यह मामला पकड़ा गया था।

ब्रह्मपुरा स्थित कारखाने पर छापेमारी में करीब ढाई क्विंटल से ज्यादा घटिया नमकीन नष्ट कराई गई थी। दरअसल, नामी कंपनियां जरा-सी खामी मिलने पर नमकीन को रिजेक्ट करके पशु आहार के लिए नीलाम करती हैं। मिलावटखोर इस नमकीन को नीलामी के दौरान सस्ते में खरीदकर सस्ते में ही खुले या दोबारा पैक करके बेचा करते थे। बरेली में हर दिन 100 टन की खपत होती थी। कोर्ट ने जनस्वास्थ्य के साथ हो रहे इस खतरनाक खेल को गंभीर मानते हुए अफसरों से जानकारी मांगी थी।

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