पिछले साल समीक्षा अधिकारी (आरओ)/सहायक समीक्षा अधिकारी (एरआरओ) की प्रारंभिक परीक्षा का पेपर लीक मामला फिर गरमा गया है। सपा सरकार के दौरान मामला सामने आने पर प्रतियोगियों की ओर से वरिष्ठ आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने लखनऊ में मामले की एफआईआर दर्ज कराई थी लेकिन उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने इस प्रकरण पर कुछ नहीं किया। घटना को आठ माह बीत चुके हैं और परिणाम अटका हुआ है। अब प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक को साक्ष्य समेत पत्र भेजकर इसकी जांच कराने की मांग की है।
आरओ-एआरओ की प्रारंभिक परीक्षा पिछले साल 27 नवंबर को हुई थी। परीक्षा दो पालियों सुबह 9.30 से 11.30 और दोपहर 2.30 से 3.30 बजे के बीच हुई थी। परीक्षा शुरू होने से पहले उसी दिन व्हाट्स ऐप पर पेपर लीक हो गया था। परीक्षा के बाद कुछ प्रतियोगियों ने व्हाट्प ऐप पर वायरल पेपर की जानकारी उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अफसरों को दी लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की, बल्कि आयोग ने छात्रों के आरोप को सिरे से खारिज कर दिया। उस वक्त छात्रों ने यहां तक आरोप लगाया कि पेपर लीक मामले में आयोग अध्यक्ष का हाथ है। छात्रों ने अपनी तरफ से एफआईआर दर्ज कराने का प्रयास किया लेकिन थाने में उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई।
रिपोर्ट लिखे जाने से इनकार करने पर छात्रों ने वरिष्ठ आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर को मामले से अवगत कराया। अमिताभ ठाकुर ने मुकदमा दर्ज कराने के लिए लखनऊ के हजरतगंज थाने में तहरीर दी लेकिन उनके कहने पर भी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई और अंत में न्यायालय के आदेश पर अमिताभ ठाकुर की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। हालांकि इसके बाद मामले में कुछ नया नहीं हुआ। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय ने मुख्यमंत्री और डीजीपी को पत्र भेजकर बताया है कि पेपर लीक होने के बाद छात्रों ने आयोग के अध्यक्ष से मुलाकात कर उन्हें मामले से अवगत कराया था लेकिन आयोग ने अपनी तरफ से न तो एफआईआर दर्ज कराई और न ही कोई जांच कराई। अब तक परीक्षा परिणाम घोषित नहीं हुआ है। अगर इसकी जांच नहीं होती है तो दोषी बच निकलेंगे और प्रतिभाशाली छात्रों के साथ अन्याय होगा। मीडिया प्रभारी ने आशंका जताई है कि आयोग मामला ठंडा होने का इंतजार कर रहा है ताकि परिणाम जारी कर मामले को रफा-दफा कर दिया जाए।