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Prayagraj News: 5.5 करोड़ की चोरी, छह साल में नहीं पूरी हो सकी जांच

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लखनऊ में बैंक के लॉकर काटकर चोरी की घटना के बाद प्रयागराज का यूको बैंक कांड फिर चर्चा में है। सिविल लाइंस में यूको बैंक की शाखा काटकर 5.5 करोड़ की चोरी की इस वारदात की विवेचना छह साल में भी पूरी नहीं हो सकी है।
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घटना में शामिल चार आरोपी अब भी फरार हैं जबकि जेल भेजे गए आठ आरोपियों से बरामद गहने अब तक उनके मूल स्वामियों के सुपुर्द नहीं किए जा सके हैं। लखनऊ के चिनहट में एक दिन पहले इंडियन ओवरसीज बैंक के 42 लॉकर तोड़कर करोड़ों के गहने व कीमती सामान चोरी करने की घटना एक दिन पहले सामने आई।
ठीक इसी तरह की एक घटना छह साल पहले एक मई 2018 को शहर में भी हुई थी। सिविल लाइंस में सरदार पटेल मार्ग स्थित यूको बैंक के 17 लॉकर काटकर चोर पांच करोड़ के गहने व 50 लाख नकद उड़ा ले गए थे। इस मामले में प्रयागराज से आठ व झारखंड से जेल भेजे गए सरगना हसन चिकना समेत नौ आरोपियों पर चार्जशीट हो चुकी है। हालांकि अब तक चार आरोपी नहीं पकड़े जा सके हैं। इनमें तबरेज, मुख्तार, महेश स्वर्णकार व शशि शाह शामिल हैं।
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शिनाख्त कार्रवाई के फेर में अटकी सुपुर्दगी
एक खास बात यह भी है कि प्रयागराज से जेल भेजे गए सदस्यों से बरामद गहने भी अब तक वारिसों के इंतजार में है। दरअसल नियमों के मुताबिक, इन गहनों को शिनाख्त कार्रवाई के बाद ही हैंडओवर किया जा सकता है। इसमें आकार, वजन व पावती पर दर्ज रिकॉर्ड के जरिए दावे की सत्यता का पता लगाया जाता है। जिसमें बरामद गहनों की तरह ही दिखने वाले नकली गहनों को रखकर दावाकर्ता से अपने गहने पहचानने के लिए कहा जाता है। इसके बाद ही बरामद सामान संबंधित को सौंपा जा सकता है।
अब तक यह कार्रवाई नहीं हो सकी है। पूर्व में इसके लिए पुलिस की ओर से डीएम को पत्र भी भेजा जा चुका है। दरअसल डीएम ही इस कार्रवाई के लिए एडीएम स्तर के अधिकारी नामित करते हैं। इस मामले में डीसीपी क्राइम सिद्धार्थशंकर मीणा का कहना है कि मामला उनकी तैनाती से पहले का है। फिलहाल उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। उनका कहना है कि जानकारी कर जो भी कार्रवाई शेष है, उसे पूरा कराया जाएगा।
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