कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के मामले में जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद महिला ने कहा है कि उन्होंने तो कोई क्लीन चिट नहीं दी। यह बात सही है कि जांच कमेटी के नोडल अफसर उनसे एफिडेविड पर हस्ताक्षर कराने आए थे लेकिन, वह चाहती थीं कि व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपनी बात रखें। वह केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय में भी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपनी बात रखना चाहती हैं।
‘अमर उजाला’ से हुई बातचीत में महिला ने दावा किया कि उनके पास जो ड्राफ्ट तैयार करके भेजा गया था, उसमें कुछ लाइनें गलत थीं। मैं कैसे कह दूं कि प्रो. हांगलू को नहीं जानती हूं। वह तो कई बार मेरे घर आ चुके हैं। जांच कमेटी के नोडल अधिकारी देवेश गोस्वामी मेरे पास एफिडेविड लेकर आए थे। इसे पढ़ने के बाद मैंने कुछ लाइनें काट दीं। इसके बाद वह दूसरा एफिडेविड बनवाकर लाए और फिर मैंने उस पर हस्ताक्षर किए। मैं तो चाहती हूं के जांच कमेटी मुझे सामने बुलाए और मैं अपनी बात रख सकूं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय भी मुझे बुलाए ताकि मैं वहां भी अपनी बात कह सकूं।
- जांच रिपोर्ट आने के बाद भी कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू ने अब तक सामने आकर अपनी बात नहीं रखी है। रविवार को भी इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पीआरओ प्रो. चित्तरंजन कुमार सिंह ने विश्वविद्यालय के अतिथि गृह में प्रेस कांफ्रेंस में विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष रखा। जब उनसे पूछा गया कि क्लीन चिट मिलने के बाद क्या कुलपति ज्वाइन करेंगे तो इस पर पीआरओ ने कहा कि कुलपति फिलहाल शहर से बाहर हैं। वह कब ज्वाइन करेंगे, इसकी जानकारी नहीं है।
महिला ने एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा है कि कुलपति पर लगे आरोप बेबुनियाद हैं। महिला ने यह भी स्वीकार कि कुलपति प्रो. हांगलू ने कभी भी उनसे अश्लील बातें नहीं कीं। महिला ने बताया कि कि किसी से मिलना या बात करना शोषण नहीं होता। इंटरव्यू यूट्यूब पर भी अपलोड कर दिया गया है। हालांकि प्रेस कांफ्रेंस के दौरान इविवि प्रशासन की ओर से जब यह इंटरव्यू दिखाया गया, उस वक्त तक यह वीडियो यूट्यूब पर अपलोड नहीं किया गया था।
न्यायमूर्ति अरुण टंडन की अध्यक्षता वाली जांच कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि एबीवीपी के राष्ट्रीय मंत्री एवं इविवि के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्र, पूर्व अध्यक्ष दिनेश यादव, पूर्व महामंत्री निर्भय द्विवेदी, पूर्व उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह एवं छात्र नेता आनंद सिंह ने पत्र के माध्यम से कहा था कि जांच कमेटी नियमों के विपरीत बनी है। इस पर न्यायमूर्ति कमेटी की रिपोर्ट के हवाले से न्यामूर्ति अरुण टंडन ने कहा है कि वह इस पत्र पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। वह कोई विभागीय या न्यायिक जांच नहीं कर रहे हैं। वह केवल प्रो. हांगलू पर लगे आरोपों के तथ्यों की जांच कर रहे हैं।
जांच कमेटी की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि महिला से एफिडेविड लेने के लिए कमेटी के नोडल अफसर को महिला के पास भेजा गया था। इसके अलावा महिला ने जांच कमेटी के अध्यक्ष को फोन पर मैसेज भी भेजा था। नोडल अधिकारी इस बात की तस्दीक करने गए थे कि मैसेज महिला के फोन से आया है या नहीं।
जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में यह सिफारिश भी की है कि भविष्य में अगर कोई शिकायत दर्ज कराना चाहता है तो उसकी शिकायत के साथ एफिडेविड भी लिया जाए।
इविवि छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष ऋचा सिंह एवं रोहित मिश्र ने कहा है कि जांच रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि कोई विभागीय या न्यायिक जांच नहीं की गईद्य। रिपोर्ट में फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की बात की गई है। इस बाबत कुलपति के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह उच्च स्तरीय जांच समिति के समक्ष अपना पक्ष एवं साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे। छात्रों ने तय किया था कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से कमेटी गठित की गई तो वह उस कमेटी के समक्ष कुलपति के खिलाफ साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे।
जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद भी कई सवाल अनसुलझे हैं। छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष रोहित मिश्र ने सवाल उठाए हैं कि महिला की ओर से दिए गए एफिडेविड में अगर कुलपति के खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया गया है तो उस महिला ने कुलपति को आरोप से मुक्त भी नहीं किया है। यह सवाल भी है कि जब महिला खुद जांच कमेटी के समक्ष उपस्थित होकर अपनी बात रखना चाहती थी तो उसे क्यों नहीं बुलाया गया। रोहित का यह सवाल भी है कि पूरे मामले की जांच एक महिला और कुलपति के बीच व्हाट्ए एप चैट और कॉल रिकार्डिंग के मामले में हो रही थी लेकिन रिपोर्ट में इस मसले का कोई जिक्र नहीं है। रोहित ने यह सवाल भी उठाए हैं कि व्हाट्स एप चैट और कॉल रिकार्डिंग की तकनीकी जांच आखिर कौन करेगा?