गंगा-यमुना का जलस्तर लगातार दूसरे दिन मंगलवार को भी घटा लेकिन कछार में बने मकानों पर बाढ़ का खतरा अब भी मंडरा रहा है। मध्य प्रदेश या उत्तराखंड से पानी छोड़ा जाता है तो जलस्तर में फिर वृद्धि शुरू हो जाएगी। संभावित खतरे को देखते हुए डीएम ने मंगलवार को बाढ़ क्षेत्र का जायजा लिया। बाढ़ चौकियों को चौबीस घंटे काम करने के निर्देश दिए और पल-पल की सूचना इकट्ठा कर उसके बारे में जानकारी देने को कहा।
फाफामऊ में गंगा का जलस्तर मंगलवार को 80.09 मीटर रहा जबकि छतनाग में गंगा का जलस्तर 78.77 मीटर दर्ज किया गया। दोनों जगह गंगा खतरे निशान से नीचे हैं। फाफामऊ में पिछले चौबीस घंटे के दौरान 41 और छतनाग में 88 सेमी जलस्तर घटा है। वहीं, यमुना का जलस्तर 79.36 मीटर है, जो चौबीस घंटे में 90 सेमी कम हुआ है। बाढ़ क्षेत्र का निरीक्षण करने पहुंचे डीएम संजय कुमार ने संबंधित अफसरों को निर्देश दिए कि चौबीस घंटे अलर्ट पर रहें और जलस्तर पर नियमित निगरानी रखें। मध्य प्रदेश, दिल्ली एवं अन्य स्थानों पर भारी बारिश को देखते हुए यहां भी अफसरों से मुस्तैद रहने को कहा।
उन्होंने बांध पर बने कंट्रोल रूप में 24 घंटे खुला रखने और वहां अफसरों एवं कर्मचारियों की शिफ्टवार लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कंट्रोल रूम में तैनात कर्मी लगातार हरिद्वार, बेतवा, नरौरा, कानपुर एवं केंद्रीय जल कमीशन से जानकारी लेकर सूचनाएं देते रहें। इस कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने नगर निगम के अफसरों को निर्देश दिया कि जहां भी बाढ़ का पानी कम हो, वहां ब्लीचिंग पाउडर एवं कीटनाशक दवाओं का छिड़काव जरूर करें ताकि संक्रामक बीमारी न फैले।