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जलस्तर अस्सी के पार, लगा मुसीबतों का अंबार

Wed, 19 Aug 2015 01:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद। मध्य प्रदेश के मैदानी और उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में हुई बारिश के चलते गंगा-यमुना में फिर उफान आ गया है और कछारी इलाकों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। गंगा का जलस्तर 80 मीटर पार गया है, सो मुसीबतों में घिरी कछार में बसी आबादी पलायन करने लगी है। मध्य प्रदेश में केन, बेतवा का जलस्तर बढ़ने से जहां यमुना का जलस्तर बढ़ रहा है, वहीं कानपुर बैराज से साढ़े तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से गंगा के जलस्तर में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
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सिंचाई विभाग बाढ़ प्रखंड की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को गंगा का जलस्तर फाफामऊ में 80.610 मीटर व छतनाग में 79.420 मीटर दर्ज किया गया । जबकि नैनी में यमुना का जलस्तर 80.100 मीटर तक पहुंच गया है। सिंचाई विभाग बाढ़ प्रखंड अधिकारियों के मुताबिक मंगलवार सुबह आठ  बजे के बाद दोनों नदियों के जलस्तर में 16 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई है। विभागीय अधिशासी अभियंता का कहना है कि हालांकि दोनों नदियों का जलस्तर अभी खतरे के निशान (84.734 मीटर) से काफी नीचे हैं लेकिन फिर भी अधिकारियों, कर्मचारियों को सतर्क कर दिया गया है। कंट्रोल रूम के जरिए दोनों नदियों के जलस्तर की चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है।

दूसरी ओर गंगा में बाढ़ के चलते स्लूज गेट को एहतियातनबंद कर दिया गया है। दूसरी ओर मोरी गेट का पंप बंद होने से निचले इलाकोें में जलभराव शुरू हो गया है। लोगों को इस बात का डर सता रहा है कि यदि गंगा का जलस्तर और बढ़ता है, साथ ही बारिश होती है तो निचले इलाकों में भारी जलभराव होगा, जिससे निपटना आसान नहीं होगा।
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कछारी इलाकों से पलायन की तैयारी, समेटने लगे सामान
 गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही कछारी इलाकों मसलन मऊ सरइयां, अशोक नगर, गंगानगर, रसूलाबाद, छोटा बघाड़ा, सलोरी, बख्शीखुर्द, दारागंज जैसे इलाकों में लोग सामान समेटने लगे हैं। इन इलाकों में रहने वाले सामानों को समेटकर दूसरी मंजिल पर पहुंचाने लगे हैं।
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