चक मीरापट्टी में जलभराव की समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। इसे लेकर मंगलवार को यहां सैकड़ों महिलाएं पहले मंडलायुक्त और उसके बाद डीएम कार्यालय पहुंची। अफसरों के न मिलने पर महिलाएं डीएम कैंप कार्यालय के बाहर धरने पर बैठक गई। इस दौरान भीषण उमस में एक महिला बेहोश हो गई। इससे वहां हड़कंप मच गया। आनन-फानन में एंबुलेंस मंगाकर महिला को अस्पताल भेजा गया। इसके बाद प्रशासनिक अफसर ने महिलाओं से ज्ञापन लिया और समस्या के समाधान का आश्वासन दिया।
जीटी रोड से लगे तकरीबन दो हजार घरों वाले चक मीरापट्टी में जलभराव की गंभीर समस्या है। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने यहां करीब दो वर्ष पहले सीवर लाइन बिछाई लेकिन मुख्य लाइन से कनेक्शन नहीं किया। नाला निर्माण को लेकर जीटी रोड पर कई बार धरना प्रदर्शन हो चुका है। यहां की महिलाएं मंडलायुक्त, डीएम, महापौर, नगर आयुक्त से भी कई बार गुहार लगा चुकी है। महापौर और नगर आयुक्त ने चक मीरापट्टी का निरीक्षण भी किया। समस्या को देखते हुए 14वें वित्त आयोग से 47 लाख की लागत से नाली बनाने का प्रस्ताव तैयार किया, जिसे महापौर, डीएम, नगर निगम, एडीए, पीडब्ल्यूडी ने स्वीकृति दे दी। इसके साथ हाईकोर्ट के बाहर रोड पटरी के निर्माण को भी मंजूरी दी गई लेकिन नाली की फाइल मंडलायुक्त के यहां रुकी है।
इसी के लिए मंगलवार दोपहर काफी महिलाएं मंडलायुक्त कार्यालय पहुंचीं। मंडलायुक्त के न मिलने पर महिलाएं डीएम कार्यालर्य आइं लेकिन डीएम भी नहीं मिले। परेशान महिलाएं डीएम कैंप कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गईं। इस बीच कमलेश सिंह नाम की महिला बेहोश हो गई। एंबुलेंस मंगाकर उसे तत्काल अस्पताल भेजा गया। इस बीच वहां पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट एसपी श्रीवास्तव को ज्ञापन सौंपा। एडीएम सिटी डॉ.विपिन कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि महिलाओं को समझाकर शांत कराया गया। बुधवार को मौके पर जांच कर जलनिकासी की अस्थाई व्यवस्था कराई जाएगी। बताया कि नाली निर्माण की फाइल मंडलायुक्त के यहां स्वीकृति के लिए गई है। उधर, महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी का कहना है कि मंडलायुक्त चक मीरापट्टी के बजाए रोड पटरी का काम पहले कराने पर जोर दे रहे हैं। इसकी वजह से वहां की महिलाओं में नाराजगी है।