swami swaroopanand saraswati
जगदगुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती और स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के बीच ज्योतिष्पीठ की गद्दी को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। हाल में ही द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के ज्योर्तिमठ पहुंचने और वहां के संचालन का पदभार ग्रहण करने की तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद यहां ज्योर्तिमठ से जुड़े लोग हैरान हैं।
ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य परामर्शदायिनी समिति के मंत्री विद्वान जी ने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को ज्योतिष्पीठ का प्रभार सौंपने की बात अमर्यादित है। स्वामी स्वरूपानंद ज्योतिष्पीठ के न कभी शंकराचार्य थे और न हो सकते हैं। ज्योतिष्पीठ का संचालन स्वामी वासुदेवानंद के ही हाथ है।
इस बीच ज्योतिष्पीठ के प्रवक्ता ओंकार नाथ त्रिपाठी ने मठ के प्रभार की बात को निराधार बताया। प्रवक्ता के अनुसार इस प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय में अपील लंबित है और स्वरूपानंद इस पीठ पर खुद को कभी गुरु- शिष्य परंपरा के तहत तो कभी स्वयंभू पीठाधीश्वर बताते रहे हैं। सनातन परंपरा की इस सर्वोच्च पीठ को लेकर उनको ऐसा अमर्यादित कदम नहीं उठाना चाहिए था।