एनसीजेडसीसी में टारे न टरे लेख का नाट्य मंच किया गया।
- फोटो : अमर उजाला।
टारे-टरे न लेख के जरिए संदेश दिया गया कि समय बदले या जन्म-जन्मान्तर, लेकिन विधि का विधान नहीं बदला जा सकता। सुग्गा -सुग्गी के संगम स्नान से शुरू हुई कहानी श्रवण कुमार की लोकगाथा में परिवर्तित होकर राजा दशरथ के पुत्र वियोग में प्राण त्यागने तक दर्शकों को रोमांचित करती रही। इस प्रस्तुति में सूत्रधारों की भूमिका में कंचन लाल यादव, अभयराज यादव एवं मनोज कुमार ने कहानी को बड़े ही सलीके से पेश किया।
साथ ही सुग्गा देशराज पटारिया, सुग्गी अशोक कुमार रसिया, उद्यान ऋषि रामसूरत पायल, मेढक के रूप में ज्ञानेंद्र गौतम का अभिनय सराहा गया। चंद्रकला के रूप में कुमारी सोनी, श्रवण कुमार के रूप में नीरज अग्रवाल ने बेजोड़ अभिनय किया। गीत रामसिंह यादव के थे और नाट्य लेखन राजकुमार श्रीवास्तव ने किया था। लोक नाट्यविद अतुल यदुवंशी के इस नाट्य निर्देशन को खूब सराहना मिली।