कोरोना वायरस के खतरे के बीच पूरे देश में चल रहे लॉकडाउन के दौरान एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नियोक्ताओं से अपील कर रहे हैं कि किसी को नौकरी से न हटाया जाए, वहीं दूसरी ओर प्रयागराज के सेंट मैरी कॉन्वेंट (एसएमसी) स्कूल में एक साथ पांच शिक्षक-शिक्षिकाओं को नौकरी से हटा दिया गया है।
इन शिक्षकों के सामने लॉकडाउन के समय अपनी आजीविका चलाना कठिन हो गया है। नौकरी से हटाए गए शिक्षकों में तीन, पांच और सात वर्षों से स्कूल में सेवा करने वाले भी शामिल हैं। नौकरी से हटाए गए इन शिक्षकों ने बताया कि उन्हें हटाए जाने से पहले स्कूल प्रशासन की ओर से कोई नोटिस नहीं दिया गया, जबकि नियुक्ति के समय उनकी सेवा शर्त में शामिल है कि एक महीने पूर्व नोटिस देने के बाद ही उन्हें सेवा से हटाया जा सकता है।
शिक्षिकाओं ने बातचीत के दौरान बताया कि स्कूल की प्रधानाचार्या की ओर से मौखिक रूप से शिक्षण ठीक नहीं होने की बात कहकर हटाया गया है। शिक्षकों का कहना है कि शहर के एक प्रतिष्ठित स्कूल को अपने शिक्षकों को परखने में पांच से सात वर्ष का समय कैसे लग गया।
इन शिक्षकों ने आरोप लगाया कि दो वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद उनका प्रोबेशन हर बार बढ़ा दिया जाता रहा। अब प्रोबेशन अवधि पूरी होने के बाद स्कूल को उन्हें स्थायी नियुक्ति देनी पड़ती, इससे उन्हें वेतन अधिक देने के साथ पीएफ का भी भुगतान करना पड़ता, इस कारण से स्कूल प्रबंधन ने उन्हें हटा दिया।