कई सफाईकर्मी अब भी रह रहे टेंट में
कुंभ के दौरान संगम पर पांच सफाई कर्मियों के पांव पखारकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व पटल पर मानवता का संदेश दिया था। 21 दिसंबर को पीएम एकबार फिर उसी संगम तट स्थित परेड मैदान में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से संवाद करने आ रहे हैं। पीएम के आने की आहट उन सफाईकर्मियों की अस्थाई झोपड़ियों तक तब पहुंची, जब सीएम योगी शनिवार को तैयारियों का जायजा लेने संगम पहुंचे।
पीएम ने जिन पांच सफाई कमियों के पांव पखारे थे, उनमें से तीन कर्मी प्यारे लाल, नरेश कुमार चमके और ज्योति देवी उसी संगम के पास टेंट लगाकर जिंदगी बसर कर रहे हैं। जबकि,होरी लाल और चौबी देवी बांदा जिले के बबेरू स्थित अपने गांव चले गए हैं। पीएम के आगमन की जानकारी मिलने के बाद से सफाईकर्मी प्यारे लाल की आंखों में उम्मीद की किरण एक बार फिर जग गई है।
तीन हजार तक भी नहीं मिलती पगार
उसका कहना है कि एक बार कोई मंच तक ले जाकर उसे पीएम से मिलवा भर दे, ताकि वह अपनी पीड़ा उन तक पहुंचा सके। प्यारे लाल का कहना है कि संगम क्षेत्र में झाड़ू लगाने के एवज में कभी तीन हजार तो कभी पांच हजार रुपये दिहाड़ी के रूप में दिए जा रहे हैं। तीन-तीन महीने तक पगार नहीं मिल रही है। इससे परिवार की जीविका चलाना मुश्किल हो गया है। इसी तरह नरेश कुमार चमके भी पीएम के आगे अपनी बात कहना चाहता है।
चमके ने अमर उजाला को बताया कि कुंभ-2019 के दौरान 10 हजार रुपये महीने पारिश्रमिक मिलता था। अब आठ हजार रुपये मिलने लगा है। बच्चों की पढ़ाई के लिए वादे किए गए थे। हमने डीएम, एसडीएम से लेकर मेलाधिकारी तक दौड़ लगाई, लेकिन किसी ने फरियाद नहीं सुनी।