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काढ़े के ओवरडोज से लिवर संक्रमण का खतरा, सोशल मीडिया की आधी अधूरी जानकारी बन रही घातक

Sat, 08 Aug 2020 01:00 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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काढ़ा - फोटो : amar ujala
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कोरोना संक्रमण काल में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) बढ़ाने के लिए लोग खुद डॉक्टर बने हैं। बिना डॉक्टरों की सलाह के घरेलू 

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नुख्सों के साथ सोशल मीडिया पर मिली आधी-अधूरी जानकारी लोगों को परेशानी में डाल रही है। इम्युनिटी के लिए लोग काढ़ा, विटामिन सप्लीमेंट के साथ घर की रसोई में मौजूद औषधीय गुणों वाले मसालों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
चूंकि लोगों को काढ़ा से इतर  नियमित उपयोग वाली काली मिर्च, लहसुन, दालचीनी, गिलोय, एलोवेरा जैसी स्वास्थ्यवर्धक वस्तुओं की सही मात्रा नहीं मालूम है, इललिए इनका ओवरडोज सेहत पर भारी पड़ रहा है। सर्वाधिक मामले पेट रोग से जुड़े हैं। गैस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट के पास पहुंचे लोग पेट दर्द, ऐंठन, दस्त, कब्ज की शिकायत कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट में आहार नली में दिक्कत के साथ पेट में अल्सर के मामले भी सामने आए हैं। 

Ayurvedic Herbal Treatment - फोटो : Social Media
केस-एक
काढ़े में डाला बेहिसाब गरम मसाला, लिवर संक्रमित
एक निजी मोबाइल कंपनी में सुपरवाजर को लॉकडाउन में भी भागदौड़ करनी पड़ी। कोविड संक्रमण से बचाव को एहतियात बरते। साथ ही सुबह, शाम अदरक, सोंठ, काली मिर्च, दालचीनी का काढ़ा पी रहे हैं। इससे उन्हें पेट में जलन रहने लगी। इसे उन्होंने कुछ दिन नजरंदाज किया पर अब दिक्कत बढ़ी है। एक दिन नाक से खून भी आया। डॉक्टर को दिखाया तो पता चला कि काढ़े की ओवरडोज इसका कारण है। मसालों की गर्म तासीर से आहार नली में छेद हो गए हैं। 

Herbal park
केस-दो 
एक समाजसेविका हैं। पति भी मेडिकल स्टोर चलाते हैं। उन्होंने सहेलियों को विटामिन सी और डी थ्री लेने की सलाह मुफ्त में दे दी। पांच में दो 
लोग पेट में मरोड़ से परेशान है। डॉक्टरों को बताया कि विटामिन के साथ काढ़ा भी ले रहे हैं। डॉक्टर राहुल दीक्षित का कहना है कि विटामिन सी का ओवरडोज कुछ खास नहीं पर नुकसान करता है।

यह निर्भर करता है कि हम विटामिन किस रूप में ले रहे हैं। क्रैंप और नॉशिया की शिकायत हो सकती है। पेट में मरोड़ इसका नतीजा हो सकता है। विटामिन सी की डोज ज्यादा हुई तो पेशाब से निकल जाती है, लेकिन विटामिन डी थ्री से कई दिक्कतें हो सकती हैं। फिलहाल अपने देश में सौ में 95 लोगों में विटामिन डी थ्री की कमी सामने आती है। लोग जो बता रहे हैं उससे साफ है कि विटामिन की ओवरडोज ली जा रही है। जबकि वयस्क महिला के लिए 70 मिलीग्राम और पुरुष के लिए 90 मिलीग्राम पर्याप्त है। अधिकता विटामिन की ही नहीं किसी भी चीज की नुकसानदायक होती है। इसलिए सलाह के बिना दवा या सप्लीमेंट न ही लें तो अच्छा है। 

cinnamon - फोटो : pixa

दालचीनी में हेपेटॉक्सिन ज्यादा इसलिए लिवर के लिए नुकसानदायक

न्यूट्रिशियन्स और वैद्यों का कहना है कि दालचीनी में हेपेटॉक्सिन ज्यादा होता है, इललिए इसकी निश्चित मात्रा दवा और अधिकता विकारों का कारण बनती है। दालचीनी, लौंग, सोंठ का संतुलित प्रयोग बीमारियों, संक्रमण में लाभकारी है। बिना सलाह मनचाही खुराक बीमार कर सकती है। काढ़ा निश्चित रूप से रामबाण है, लेकिन इसमें प्रयुक्त सामग्री निर्धारित मात्रा में ही ली जानी चाहिए। काढ़ा किसके लिए एक बार किसके लिए दो बार जरूरी है, इसका निर्धारण भी व्यक्ति के काम और मर्ज के आधार पर किया जाता है। - डॉ. एसके राय, आयुर्वेंदाचार्य

प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

आयुर्वेद सही मात्रा और दवाओं के सटीक संतुलन पर लाभदायक

आयुर्वेद के तथ्य प्रमाणिक पूर्णत: सिद्ध और निर्दोष हैं। कोरोना संक्रमण काल में काढ़े का सेवन का प्रश्न है तो सही है कि काढ़ा पूर्णत:  सुरक्षित होता है पर उसमें डालने वाले द्रव्य, प्रयोग करने वाले व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्थिति को देखकर, संतुलित मात्रा में डालना चाहिए। बेहतर होगा कि काढ़ा प्रयोग करने से पहले किसी आयुर्वेद विशेषज्ञ से अपने और काढ़े में प्रयुक्त होने वाले द्रव्यों के अनुपात के बारे में सलाह ले लें। बेहिसाब काढ़े का प्रयोग नुकसान कर सकता है। शास्त्रीय काढ़ों के बारे में जानकारी लें फिर प्रयोग करें। भ्रांतियों से बचें, सोशल मीडिया की हर सलाह आप पर फिट हो, इसे सही नहीं कहा जा सकता। काढ़े की मात्रा स्त्री, पुरुष और बच्चों के लिए अलग-अलग हो सकती है। इसलिए आयुर्वेंदिक औषधियों के इस्तेमाल से पहले उनके गुणों के बारे में जान लें तो बेहतर परिणाम मिलेंगे। - वैद्य आशुतोष मालवीय
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दालचीनी दूध - फोटो : सोशल मीडिया
इंटरनेट नहीं डॉक्टर की सलाह पर लें दवाएं अन्यथा बढ़ेगी परेशानी
कोरोना संक्रमण काल में लोग सोशल मीडिया पर ज्यादा समय दे रहे हैं। इंटरनेट पर काढ़ा बताया तो बिना मात्रा बेहिसाब पिया नतीजा पेट खराब होगा। इम्युनिटी एक दिन में नहीं बढ़ती। शरीर और वजन के हिसाब के साथ बीमारी या लक्षणों पर दवाओं का सेवन किया जाता है। इसलिए इम्युनिटी बढ़ाना है या पेट का दर्द ठीक करना है, विशेषज्ञ की सलाह एक बार जरूर लें। कई मामले ऐसे सामने आए हैं कि लोग खुद डॉक्टर बनकर गोलियां खाकर बड़ी परेशानी से घिरकर जांच और इलाज करा रहे हैं। लिवर संवेदनशील होता है, इसलिए उसके साथ खिलवाड़ नहीं परहेज के साथ उसका खुद ख्याल रखें। दिक्कत हो तो गैस्ट्रोइंटोलॉजिस्ट से सलाह लें। फैटी लीवर का इलाज दवाएं नहीं बल्कि जागरूकता और व्यायाम है। - डॉ. आलोक मिश्रा, गैस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट, डीएम
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