पीसीएस-2016 का परिणाम प्रश्नों के विवाद के कारण लंबे समय तक अटका रहा। मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया और वहां से स्टे मिलने के बाद उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने परीक्षा की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। इस बीच आयोग की परीक्षाओं की सीबीआई जांच भी शुरू हो गई और परीक्षा परिणाम पर जांच का भी थोड़ा बहुत प्रभाव पड़ा।
पीसीएस 2016 की प्रारंभिक परीक्षा 20 मार्च 2016 को आयोजित की गई थी और दो माह बाद 27 मई को परीक्षा परिणाम भी घोषित कर दिया गया था। इस बीच गलत सवाल पूछे जाने के मामले में अभ्यर्थियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी थी। दिसंबर 2016 में हाईकोर्ट ने प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम संशोधित करने का आदेश दिया। आयोग ने इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल कर दी और 2017 की शुरुआत में आयोग को स्टे मिल गया।
इसके बाद आयोग ने मुख्य परीक्षा की कॉपियां जंचवाने का काम शुरू किया तो आयोग की परीक्षाओं की सीबीआई जांच शुरू हो गई। जांच के दौरान पीसीएस-2015 में कॉपियों के मूल्यांकन में व्यापक तौर पर गड़बड़ी सामने आने के बाद सीबीआई ने मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया, सो मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने कॉपियां जंचवाने में अतिरिक्त सतर्कता बरती और यही वजह रही कि कॉपियों का जांचने का काम एक साल से भी अधिक समय तक चला। इन तमाम वजहों से अभ्यर्थियों को अंतिम चयन परिणाम के लिए तकरीबन तीन वर्षों तक इंतजार करना पड़ा।
पीसीएस-2016 का अंतिम चयन परिणाम जारी करने के बाद यूपीपीएससी का अगला लक्ष्य पीसीएस-2018 की प्रारंभिक परीक्षा और पीसीएस-2017 की मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित करना है। पीसीएस-2018 की प्रारंभिक परीक्षा की उत्तरकुंजी आयोग जारी कर चुका है और इस पर आपत्तियां भी ली जा चुकी हैं। आयोग के सूत्रों का कहना है कि आपत्तियों का निस्तारण कर लिया गया है और रिजल्ट तैयार किया जा रहा है। मार्च के पहले सप्ताह में परिणाम आ सकता है। वहीं, पीसीएस-2017 की कॉपियां जांचे जाने का काम चल रहा है। परिणाम में कम से कम एक माह का समय लग सकता है।