इस दौरान नायाब तहसीलदार अखिलेश कुमार, कानूनगो श्वेता सिंह एवं सदर तहसील से लेखपाल समेत कुछ कर्मचारियों के सहयोग से पूर्वोत्तर रेलवे की टीम ने दोहरीकरण के लिए निशान लगाने की कार्रवाई आरपीएफ रामबाग की मौजूदगी में शुरू की। उत्तर रेलवे की लखनऊ रेल लाइन को केंद्र मानकर दोहरीकरण के लिए पैमाइश की गई। रामबाग से जंक्शन के बीच लखनऊ रेल लाइन से न्यूनतम 55 फीट एवं अधिकतम 190 फीट तक दूर तक निशान लगाए गए। बताया जा रहा है कि अगर दोहरीकरण काम शुरू हुआ तो 200 से ज्यादा भवनों को आंशिक या पूर्ण रूप से ध्वस्त किया जा सकता है। हालांकि, इसके पूर्व रेलवे द्वारा पहले सभी भवन स्वामियों को नोटिस भेजा जाएगा।
उधर, पैमाइश के दौरान मोहल्ले वालों ने कहा कि उनका मकान फ्री होल्ड जमीन पर बना है। मकान की रजिस्ट्री भी है। ऐसे में रेलवे कैसे उनके मकान पर लाल निशान लगा सकता है। यहां एमके श्रीवास्तव, मनोज मिश्र, ननकू लाल, सीताराम आदि ने कहा कि रेलवे चाहे तो बिना किसी मकान को ध्वस्त किए बगैर दोहरीकरण कर सकता है। क्योंकि रामबाग से जंक्शन जाने वाली लाइन के बगल में काफी जमीन खाली है। जहां आराम से एक और ट्रैक बिछाया जा सकता है।
- प्रशासन की टीम सिर्फ मानचित्र के आधार पर रेलवे अफसरों की पैमाइश के लिए मदद करने गई थी। रेलवे ही संबंधित लोगों को नोटिस देगा, जिन्होंने अवैध कब्जा कर निर्माण करवा रखे हैं। -अजय नारायण राय, एसडीएम सदर।
- आज पैमाइश का काम हुआ है। अब रेलवे द्वारा संबंधित लोगों को नोटिस दिए जाने की कार्रवाई होगी। नोटिस देने के बाद नियमानुसार लोगों को समय भी दिया जाएगा। अशोक कुमार, पीआरओ वाराणसी मंडल, पूर्वोत्तर रेलवे