हाईकोर्ट ने कहा है कि शादी का झांसा देकर किसी महिला से शारीरिक संबंध बनाने की स्वीकृति प्राप्त करना बलात्कार की श्रेणी में आएगा और इसके लिए आरोपी के खिलाफ बलात्कार का मुकदमा चलेगा। कोर्ट ने बलात्कार के आरोपी पीसीएस अधिकारी अरविंद कुमार पाठक की याचिका खारिज करते हुए स्पेशल सीजेएम इलाहाबाद के समन आदेश को वैध ठहराया है। याचिका पर न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने सुनवाई की।
याची अरविंद कुमार पाठक असिस्टेंट ट्रेड टैक्स कमिश्नर के पद पर तैनात है। उनके विरुद्ध इलाहाबाद के कर्नलगंज थाने में एक युवती ने मुकदमा दर्ज कराया है। यहां पढ़ाई के दौरान दोनों की दोस्ती हुई थी। आरोप है कि अरविंद ने युवती को शादी करने का झांसा देकर उससे शारीरिक संबंध बनाया। इसके बाद पीसीएस में सेलेक्ट होने पर शादी करने से मुकर गया। पीड़िता ने इस मामले में कर्नलगंज थाने में बलात्कार और मारपीट का मुकदमा दर्ज कराया है।
अधीनस्थ अदालत ने तीन मार्च 2014 को समन जारी कर आरोपी को तलब किया था। इसके खिलाफ निगरानी एडीजे कोर्ट से खारिज होने के बाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। आरोपी का कहना था कि उसके विरुद्ध जांच में कोई तथ्य नहीं पाया गया है इसलिए मुकदमे की कार्यवाही को रद्द किया जाए। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया साक्ष्यों में पर्याप्त बल पाते हुए याचिका पर हस्तक्षेप से इंकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यदि पीड़िता ने झूठे शादी के आश्वासन पर विश्वास कर शारीरिक संबंध बनाने की अनुमति दी भी है तो ऐसा मामला बलात्कार की श्रेणी में आएगा।