मुकदमा दर्ज होने के बाद विवेचना झूंसी थाने में तैनात एसआई लाखन सिंह को मिली। सूत्रों का कहना है कि विवेचना के दौरान दरोगा ने सिर्फ मौके से पकड़े गए सरगना समेत तीन आरोपियों पर ही आरोप सही मिलने और उनके खिलाफ चार्जशीट लगा दी। जबकि सरगना की ओर से अपने इकबालिया बयान में जिन आरोपियों को अपने गैंग का सक्रिय सदस्य बताया गया, उनके खिलाफ आरोप सही नहीं मिले और उनका नाम निकाल दिया गया।
चार्जशीट थाने से उच्चाधिकारियों के पास भेज भी दी गई। सवाल यह उठता है कि जिस मुकदमे में वादी खुद इंस्पेक्टर हों और तहरीर भी उनकी ही हो, उसमें आखिर नामजदगी कैसे गलत हो सकती है। अगर ऐसा है, तो फिर सवाल इंस्पेक्टर पर है कि आखिर उन्होंने गलत नामजदगी क्यों कराई।
गोलमोल बातें करते रहे इंस्पेक्टर
इस बारे में जब इंस्पेक्टर वैभव सिंह से बात की गई तो वह गोलमोल बातें करने लगे। पहले बताया कि मुकदमे में तीन के खिलाफ चार्जशीट लगी है। कुछ देर बाद कहा कि चार्जशीट सभी के खिलाफ लगी है, लेकिन पांच की गिरफ्तारी बिना ही चार्जशीट लगा दी गई। अगले ही पल फिर बात कोबदलते हुए कहा कि पांच अन्य आरोपियों से कोई बरामदगी नहीं हो पाई, ऐसे में रिमांड नहीं बनता। जब उनसे पूछा गया कि रिमांड बनने या न बनने का सवाल तो गिरफ्तारी के बाद उठता है, ऐसे में गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई तो उन्होंने बात काट दी। कहा कि इस बारे में वह केस डायरी देखने के बाद ही कुछ बता पाएंगे। हालांकि फिर देर रात तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया।
एसीपी ने कहा-
एसीपी झूंसी चिराग जैन का कहना है कि मुकदमे में तीन के खिलाफ चार्जशीट लगी है। नाम निकाले जाने की जानकारी नहीं है। हालांकि उनका दावा है कि अन्य के खिलाफ विवेचना की जा रही है। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।