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गजब : पुलिस ही वादी और विवेचक, फिर भी निकाल दिया पांच सट्टेबाजों का नाम

Sun, 25 Jun 2023 11:39 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

मामला पिछले साल नौ जुलाई का है। झूंसी के अनवर मार्केट स्थित एक दुकान में भारत-इंग्लैंड मैच के दौरान सट्टा कारोबार का भंडाफोड़ हुआ था। मौके से दांव पर लगाए गए 1.25 लाख नकद के अलावा एलईडी टीवी, कैलकुलेटर समेत अन्य सामान बरामद कर तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
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up police, up inspector - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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झूंसी थाने में मुकदमा इंस्पेक्टर ने लिखाया और विवेचना दरोगा ने की। इसके बावजूद पांच सट्टेबाजों के नाम निकाल दिए गए। ऑनलाइन सट्टा कारोबार के भंडाफोड़ के दौरान आरोपी बनाए गए आठ में से केवल तीन के खिलाफ ही चार्जशीट तैयार की गई। पुलिस की यह कार्रवाई सवालों में है, क्योंकि पकड़े जाने के दौरान सरगना ने खुद अपने गिरोह के पांच लोगों के नाम बताए थे।

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मामला पिछले साल नौ जुलाई का है। झूंसी के अनवर मार्केट स्थित एक दुकान में भारत-इंग्लैंड मैच के दौरान सट्टा कारोबार का भंडाफोड़ हुआ था। मौके से दांव पर लगाए गए 1.25 लाख नकद के अलावा एलईडी टीवी, कैलकुलेटर समेत अन्य सामान बरामद कर तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें विकास केशरवानी निवासी कोतवाली नगर, आयुष कुमार उर्फ पारलेजी निवासी आवास विकास कॉलोनी झूंसी व आलोक कुमार पांडेय उर्फ भाऊ निवासी हवेलिया, झूंसी शामिल थे।

मामले में वादी इंस्पेक्टर झूंसी वैभव सिंह खुद थे और उन्हीं की तहरीर पर कुल आठ लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज हुआ था। तहरीर में इंस्पेक्टर ने लिखा था कि इस गिरोह का सरगना पकड़ा गया विकास है। पुलिस की पूछताछ में उसने बताया था कि उन लाेगाें का सट्टा कारोबार का सक्रिय गैंग है, जो दूर-दराज के शहर से लाइन प्राप्त कर सट्टा संचालित करता है। इस धंधे में सतीश उसका मैनेजर है जबकि विवेक और विकास कुमार यादव सहयोगी है। इसके साथ ही रिंकू डिश हार-जीत की रकम का कलेक्शन करता है। इस काम में मकान मालिक पंडित चक्की वाला भी उनका सहयोग करता है।’

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मुकदमा दर्ज होने के बाद विवेचना झूंसी थाने में तैनात एसआई लाखन सिंह को मिली। सूत्रों का कहना है कि विवेचना के दौरान दरोगा ने सिर्फ मौके से पकड़े गए सरगना समेत तीन आरोपियों पर ही आरोप सही मिलने और उनके खिलाफ चार्जशीट लगा दी। जबकि सरगना की ओर से अपने इकबालिया बयान में जिन आरोपियों को अपने गैंग का सक्रिय सदस्य बताया गया, उनके खिलाफ आरोप सही नहीं मिले और उनका नाम निकाल दिया गया।

चार्जशीट थाने से उच्चाधिकारियों के पास भेज भी दी गई। सवाल यह उठता है कि जिस मुकदमे में वादी खुद इंस्पेक्टर हों और तहरीर भी उनकी ही हो, उसमें आखिर नामजदगी कैसे गलत हो सकती है। अगर ऐसा है, तो फिर सवाल इंस्पेक्टर पर है कि आखिर उन्होंने गलत नामजदगी क्यों कराई।
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गोलमोल बातें करते रहे इंस्पेक्टर
इस बारे में जब इंस्पेक्टर वैभव सिंह से बात की गई तो वह गोलमोल बातें करने लगे। पहले बताया कि मुकदमे में तीन के खिलाफ चार्जशीट लगी है। कुछ देर बाद कहा कि चार्जशीट सभी के खिलाफ लगी है, लेकिन पांच की गिरफ्तारी बिना ही चार्जशीट लगा दी गई। अगले ही पल फिर बात कोबदलते हुए कहा कि पांच अन्य आरोपियों से कोई बरामदगी नहीं हो पाई, ऐसे में रिमांड नहीं बनता। जब उनसे पूछा गया कि रिमांड बनने या न बनने का सवाल तो गिरफ्तारी के बाद उठता है, ऐसे में गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई तो उन्होंने बात काट दी। कहा कि इस बारे में वह केस डायरी देखने के बाद ही कुछ बता पाएंगे। हालांकि फिर देर रात तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया।

एसीपी ने कहा-

एसीपी झूंसी चिराग जैन का कहना है कि मुकदमे में तीन के खिलाफ चार्जशीट लगी है। नाम निकाले जाने की जानकारी नहीं है। हालांकि उनका दावा है कि अन्य के खिलाफ विवेचना की जा रही है। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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