बस में सफर कर रहे यात्री ने मोबाइल इस्तेमाल करते हुए ड्राइवर की वीडियो बना ली।
अवैध खनन में लगी गाड़ियों से अवैध वसूली का मामला सामने आने के बाद कोरांव के तहसीलदार के चपरासी को सस्पेंड कर दिया गया है जबकि उनका सरकारी वाहन चलाने वाला निजी ड्राइवर फरार है। ड्राइवर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई है। आरोप यह भी है कि दोनों तहसीलदार की शह पर अवैध वसूली कर रहे थे। प्रशासन ने इस मामले की भी जांच शुरू करा दी है।
कोरांव तहसीलदार का चपरासी लालता प्रसाद और ड्राइवर शिवराम पाल अवैध खनन में लगी गाड़ियों से वसूली करते थे। आरोप यह भी था कि यह काम वे तहसीलदार की शह पर कर रहे थे। मामला डीएम संजय कुमार तक पहुंचने के बाद उन्होंने एडीएम वित्त एवं राजस्व डीएस पांडेय से जांच करने को कहा। प्राथमिक जांच में यह सामने आया कि चपरासी और ड्राइवर अवैध वसूली कर रहे थे। इस पर चपरासी को सस्पेंड कर दिया गया है।
ड्राइवर प्राइवेट था। दरअसल, तहसीलदार के पास सरकारी वाहन नहीं था, सो वन विभाग का वाहन तहसील से अटैच कर दिया गया था। मामले का खुलासा होने के बाद ड्राइवर फरार हो गया है। उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई है। अब सवाल उठ रहे हैं कि तहसीलदार की गाड़ी चलाने के लिए प्राइवेट ड्राइवर क्यों रखा गया था। वह कई वर्षों से कोरांव तहसील में सरकारी वाहन चला रहा था। एडीएम वित्त एवं राजस्व डीए पांडेय का कहना है कि मामले की जांच अब एसडीएम कोरांव से कराई जा रही है। इस पर जांच विस्तार से होगी। अगर इसमें किसी अफसर की मिलीभगत साबित होती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।